न्यूयॉर्क-अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ पर हस्ताक्षर कर दिया है. इसके बाद यह बिल कानून बन गया है. यह बिल अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में दो दिन पहले ही पास हुआ था.
यह कानून राष्ट्रपति ट्रंप को रूसी तेल और गैस खरीदने वाले टॉप पांच देशों से होने वाले आयात पर 100% तक टैरिफ लगाने का ज़्यादा अधिकार देता है. इस लिस्ट में अभी भारत भी शामिल है. इसके अलावा चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने टॉप पांच देश हैं.
अप्रैल 2025 में सीनेटर लिंडसे ग्राहम और रिचर्ड ब्लूमेंथल ने अमेरिकी सीनेट में इस बिल का एक वर्जन पेश किया था. रूस प्रतिबंध बिल पूरी तरह तैयार होने, संसद में पास होने और ट्रंप के हस्ताक्षर करने से लगभग 18 महीने लग गए.
इस लिस्ट की हर 180 दिनों में दोबारा समीक्षा की जाएगी. टैरिफ की दर – जिसे अधिकतम 100 फीसदी तक किसी भी दर पर तय किया जा सकता है – राष्ट्रपति की मर्जी पर निर्भर करती है. कानून राष्ट्रपति को रूसी एनर्जी खरीदने वालों पर टैरिफ लगाने के लिए मजबूर नहीं करता है. हालांकि इस बिल का समर्थन करने वालोंखासकर सीनेटर ब्लुमेंथल ने मुख्य रूप से चीन और भारत से रूसी ऊर्जा की खरीद बंद करने को कहा है. टैरिफ को हमेशा के लिए हटाने के लिए, उन्हें यह सर्टिफाई करना होगा कि उस देश ने रूसी ऊर्जा खरीदना बंद कर दिया है और “भरोसेमंद आश्वासन” दिया है कि वे इसे दोबारा शुरू नहीं करेंगे.
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