नई दिल्ली-भारत-म्यांमार सीमा के संवेदनशील इलाकों में रहने वाले नगा नागरिकों का कहना है कि वे अपनी कथित उपेक्षा के चलते चीन समेत पड़ोसी देशों से मदद मांगने के लिए मजबूर हो सकते हैं.
मणिपुर के एक तंगखुल नगा छात्र एवं नागरिक समाज संगठन ने बीते मंगलवार को केंद्र और राज्य सरकार से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की.इंफाल में तंगखुल अज़े कतमानाओ लॉन्ग (टीएकेएल), जिसे दक्षिणी तंगखुल छात्र संघ, के नाम से भी जाना जाता है, के अध्यक्ष यारचुइसो काशुंग ने कहा, ‘इस समय हम बेहद थक चुके हैं.’
काशुंग ने नगा नागरिकों की सुरक्षा के लिए तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कहा, ‘अगर मुख्यमंत्री राज्य और उसके लोगों की रक्षा करने में असमर्थ हैं, तो उन्हें स्वेच्छा से इस्तीफा दे देना चाहिए.’
बुधवार को प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी यिंगकियोंग में टुटिंग-यिंगकियोंग के विधायक आलो लिबांग के आवास में घुस गए और वहां तोड़फोड़ की. एक वरिष्ठ जिला अधिकारी ने बताया कि उस समय कई मंत्री और विधायक इसी आवास में ठहरे हुए थे. प्रदर्शनकारियों ने यिंगकियोंग-कोमकर-गेकू सड़क को भी जाम कर दिया और डाइटे डाइम की ओर जाने वाले रास्तों को भी अवरुद्ध किया.
प्रदर्शनकारी ‘पीएफआर नहीं, सर्वेक्षण नहीं’ और ‘मुख्यमंत्री वापस जाओ’ जैसे नारे लिखी तख्तियां लिए हुए थे. उन्होंने सवाल उठाया कि परियोजना से संभावित रूप से प्रभावित होने वाले समुदायों के साथ सीधे संवाद करने के बजाय अधिकारियों के साथ औपचारिक बैठक क्यों आयोजित की जा रही है.
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