गरुड़ संरक्षण के लिए बिहार में केंद्र खुला

पटना, 7 मार्च (आईएएनएस)। मिथकों के अनुसार भगवान विष्णु के वाहक गरुड़ की विलुप्त हो रही प्रजाति को बचाने और उसके पुनर्वास का केंद्र बिहार में खोला गया है जहां इस परिवार के पक्षियों को संरक्षण दिए जाने की व्यवस्था की गई है।

पटना, 7 मार्च (आईएएनएस)। मिथकों के अनुसार भगवान विष्णु के वाहक गरुड़ की विलुप्त हो रही प्रजाति को बचाने और उसके पुनर्वास का केंद्र बिहार में खोला गया है जहां इस परिवार के पक्षियों को संरक्षण दिए जाने की व्यवस्था की गई है।

संभागीय वन अधिकारी संजय सिन्हा ने कहा कि इसी सप्ताह भागलपुर जिले में अपनी तरह का पहला केंद्र खोला गया है।

करीब आठ वर्ष बाद विलुप्ति के कगार पर पहुंचे इन पक्षियों ने भागलपुर जिले में घोंसला बनाना और प्रजनन शुरू किया है, जिससे 78 की संख्या तक पहुंच चुके पक्षियों की संख्या अब 400 हो गई है।

सिन्हा ने आईएएनएस को बताया, “गरुड़ के संरक्षण के विकास में यह एक सकारात्मक विकास है। इसके तहत अत्यंत आवश्यक अस्पताल सह बचाव एवं पुनर्वास केंद्र को छोटे स्तर पर शुरू किया गया है।”

वर्तमान में तीन पक्षियों को केंद्र में इलाज के लिए भर्ती किया गया है।

भारतीय पक्षी संरक्षण नेटवर्क के लिए बिहार एवं झारखंड के समन्वयक अरविंद मिश्र ने कहा कि यदि यह सफल होता है तो यह केंद्र दूसरे राज्यों के लिए रोल मॉडल बनेगा।

मिश्र ने कहा कि घोंसले से गिरने वाले बच्चों को उचित देखभाल मुहैया कराने और गिर जाने या घायल हो जाने वाले वयस्क पक्षियों को उचित देखभाल मुहैया कराने के लिए केंद्र खोला गया है। गरुड़ की चिकित्सा के लिए पश्चिम बंगाल के वल्चर संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र में पशु चिकित्सकों और पारामेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षण दिया गया है।

उन्होंने कहा, “स्थानीय लोगों में पक्षियों के संरक्षण एवं आश्रय के लिए जागरुकता पैदा की गई है।”

घोंसले में कमी और प्रदूषण एवं बाधाओं के अलावा शिकार और अंडा जमा करने के कारण प्रजातियों की संख्या में व्यापक कमी आ गई है।

मिश्र ने भागलपुर जिले के गंगा दियारा इलाके में 2007 में रेशम के पेड़ पर सबसे पहले गरुड़ को निवास और प्रजनन करते पाया था।

इससे पहले पक्षी को बिहार में प्रजनन की अवधि में कभी नहीं देखा गया था।

मिश्र ने कहा, “पक्षी विलुप्त होने के कगार पर हैं। पूरी दुनिया में उन्हें बचाने और संरक्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।”

उनके मुताबिक, दुनिया भर में प्रवासी माने जाने वाले गरुड़ों की संख्या केवल 1,100 है।

गरुड़ पक्षी की लंबाई 145 से 150 से. मी. (करीब तीन फीट) और उंचाई चार से पांच फीट मापी गई है।

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