ओटावा, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में और दुनिया भर के भारतीय समुदाय के बीच खासा लोकप्रिय हैं, लेकिन भारत को कारोबार अनुकूल बनाने में उन्हें काफी मेहनत करनी होगी। यह बात कनाडा के एक समाचार पत्र टोरंटो स्टार के मंगलवार के संपादकीय में कही गई।
संपादकीय में कहा गया है कि मोदी यह प्रचारित कर रहे हैं कि भारत कारोबार के लिए खुला हुआ है। यही संदेश उनकी कनाडा यात्रा को महत्वपूर्ण बनाता है।
समाचार पत्र के मुताबिक, “लेकिन मोदी और उनकी हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी के सामने काम स्पष्ट है और वह है ऐसी परिस्थिति का निर्माण करना जो कारोबार अनुकूल हो। लोकप्रियता हमेशा बरकरार नहीं रहने वाली है।”
मोदी तीन देशों की यात्रा के तहत फ्रांस और जर्मनी की यात्रा पूरी करने के बाद मंगलवार को ओटावा पहुंचे हैं। गत 42 साल में कनाडा का दौरा करने वाले वह पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। इससे पहले इंदिरा गांधी ने 1973 में कनाडा का दौरा किया था।
मोदी कनाडा में प्रधानमंत्री स्टीफेन हार्पर और विभिन्न कंपनियों के प्रमुखों से मिलेंगे और प्रवासी भारतीयों को संबोधित करेंगे।
फ्रांस और जर्मनी की भांति वह कनाडा में भी ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम का प्रचार करेंगे और भारत में निवेश करने के लिए कारोबारियों को आमंत्रित करेंगे।
समाचार पत्र में कहा गया है, “कनाडा की नजर से देखें तो मोदी के आधुनिकीकरण, विकासोन्मुख, विदेशी निवेश अनुकूल कार्यक्रमों के कारण भारत एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार देश बन सकता है, बशर्ते वह अपने वादे पर खरा उतरें और केंद्र निर्देशित और अत्यधिक सुरक्षित अर्थव्यवस्था को खोलने का प्रयास करें और अधिकारियों के बीच भ्रष्टाचार समाप्त करें।”
दैनिक के मुताबिक, भारत में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, शिक्षा, अवसंरचना, तेल एवं गैस उत्खनन और बिजली उत्पादन के क्षेत्र में कनाडा की विशेषज्ञता की जरूरत है और कनाडा से खाद्य, ऊर्वरक, खनिज और अब यूरेनियम की मांग बढ़ रही है।
संपादकीय में निराशा जताते हुए कहा गया है, “सहयोग काफी कम है। 2009 में हमने अपने आपसी व्यापार को तीन अरब डॉलर से बढ़ाकर इस साल तक 15 अरब डॉलर करने का फैसला किया था, जो हो नहीं पाया। गत वर्ष हमारा आपसी व्यापार छह अरब डॉलर था, जबकि चीन के साथ यह 77 अरब डॉलर था। साथ ही कनाडा-भारत मुक्त व्यापार समझौते में भी कोई विशेष प्रगति नहीं हो पाई है।”
दैनिक ने इस तरह के दौरे से बनने वाले सकारात्मक माहौल को हालांकि महत्वपूर्ण बताया।
दैनिक के मुताबिक, भारत द्वारा 1974 और 1998 में परमाणु बम का परीक्षण करने से द्विपक्षीय संबंधों में गिरावट आई है।
संपादकीय के मुताबिक, “अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने चीन के विरुद्ध भारत को सहयोगी मानते हुए आखिरकार 2008 में भारत को नागरिक परमाणु प्रौद्योगिकी बेचे जाने की पैरवी कर दी। उसके तुरंत बाद संबंधों को बेहतर बनाने के लिए हार्पर ने भारत का दौरा किया था।”
दैनिक में कहा गया है कि गत वर्ष आम चुनाव में मोदी को जबरदस्त समर्थन मिला, लेकिन एक साल बाद उनकी लोकप्रियता धीमे-धीमे घटती जा रही है और उन्होंने जो वादे किए थे वे कम ही पूरे हुए हैं।
संपादकीय के मुताबिक, “मोदी अब भी भरोसा नहीं जीत पाए हैं। गुजरात में मुख्यमंत्री के उनके कार्यकाल में 2002 में राज्य में हुए दंगों में 1,000 से अधिक लोग मारे गए थे। सिखों का एक बड़ा समुदाय भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रवाद पर अधिक भरोसा नहीं करता है।”
दैनिक में कहा गया है, “कनाडा में वह प्रचारित करने की कोशिश कर रहे हैं कि भारत अब बदल गया है, जहां स्मार्ट धन पहुंच रहा है। लेकिन जो बदलाव वह करना चहते हैं उसे भारत में कर दिखाने की जरूरत है।”
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