कोलंबो, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। श्रीलकां सरकार ने मंगलवार को रिश्वतखोरी के आरोपों के लिए पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे से जवाब तलब करने के लिए देश की भ्रष्टाचार विरोधी प्रमुख को तलब करने के फैसले का विरोध किया।
समाचार एजेंसी ‘सिन्हुआ’ के मुताबिक, विपक्षी सांसदों के एक समूह द्वारा राजपक्षे के खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोपों को लेकर सोमवार को संसद में विरोध प्रदर्शन के बाद संसद अध्यक्ष चमाल राजपक्षे ने रिश्वतखोरी या भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच से संबंधित आयोग की महानिदेशक दिलरुक्षी विक्रमसिंघे को तलब किया।
उप विदेश मंत्री अजीत परेरा ने कहा कि संसद अध्यक्ष द्वारा आयोग प्रमुख को तलब करने का फैसला पूरी तरह से अस्वीकार्य है, क्योंकि भ्रष्टाचार विरोधी संस्था स्वतंत्र रूप से कामकाज करती है।
पूर्व राष्ट्रपति के प्रवक्ता रोहन वेलीविटा ने कहा कि मीडिया रपटों के बावजूद राजपक्षे को जनवरी के राष्ट्रपति चुनाव से पहले सत्तारूढ़ ‘यूनाइटेड नेशनल पार्टी’ के एक पूर्व सदस्य को मंत्री पद का लालच देकर उन्हें पार्टी में शामिल करने के आरोपों की वजह से तलब किया गया। वेलीविटा का कहना है कि इस तरह के कदम गैरकानूनी नहीं हैं, क्योंकि वह उस समय राष्ट्रपति के पद पर आसीन थे।
हालांकि, इस दौरान 113 विपक्षी सांसदों, राजपक्षे के सभी समर्थकों ने मंगलवार को आयोग प्रमुख विक्रमसिंघे के खिलाफ याचिका पर हस्ताक्षर किए।
dharmpath.com dharmpath