तिरुवनंतपुरम, 4 मई (आईएएनएस)। एक सतर्कता अदालत ने यहां सोमवार को केरल के चार बार मालिकों यह फैसला करने के लिए 16 मई तक की मोहलत दी है कि वे बार घोटाला मामले में लाई डिटेक्टर परीक्षण करवाना चाहते हैं या नहीं।
घोटाले का पर्दाफाश पिछले साल अक्टूबर में तब हुआ था, जब यहां नौ मयखानों के मालिक मुखबिर बीजु रमेश ने बताया था कि वित्त मंत्री के.एम. मणि ने राज्य में बंद मयखानों को फिर से खोलने के लिए एक करोड़ रुपये रिश्वत ली थी।
इसके बाद सतर्कता विभाग ने मणि के खिलाफ एक मामला दर्ज किया था। सतर्कता विभाग ने चार मयखाना मालिकों को विभाग के समक्ष पेश होने का नोटिस भी दिया था। विभाग ने अदालत से कहा था कि यह चाहता है कि मयखाना मालिकों को लाई डिटेक्टर परीक्षण हो।
सोमवार को मयखाना मालिकों ने अदालत से कहा कि वे लाई डिटेक्टर परीक्षण के संबंध में चिकित्सा पेशेवरों से सलाह लेने के लिए और समय चाहते हैं। अदालत ने उन्हें 16 मई तक का समय दिया है।
चार मयखाना मालिकों में से एक राजकुमार ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा, “हम इसके खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हमने अदालत से कहा है कि परीक्षण से पहले हम चिकित्सा मार्गदर्शन चाहते हैं, इसलिए हमें थोड़ा और वक्त चाहिए।”
सोमवार को विभाग ने बीजू रमेश के उस आरोप की जांच शुरू कर दी है जिसमें उन्होंने कहा था कि मणि के अलावा आबकारी मंत्री के. बाबू ने भी 10 करोड़ रुपये रिश्वत ली थी।
विपक्ष के कड़े रुख के बाद केरल सरकार ने आरोपों की जांच के आदेश दिए थे।
सतर्कता विभाग ने आबकारी आयुक्त अनिल जेवियर का भी बयान लिया था।
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