तिरुवनंतपुरम, 7 मई (आईएएनएस)। संसाधनों की उपलब्धता और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के प्रभाव को लेकर राज्यों की चिंता जायज है। यह बात गुरुवार को यहां केरल के वित्तमंत्री केएम मणि ने गुरुवार को कही।
मणि वित्त मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने समूह की दो दिवसीय बैठक के अपने उद्घाटन वक्तव्य में यह बात कही। बैठक में 15 राज्यों के वित्त मंत्री और 30 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं।
जीएसटी के प्रावधान वाला विधेयक बुधवार को लोकसभा में पारित हो गया है।
मणि ने कहा, “मैं भी इस चिंता से वाकिफ हूं क्योंकि मैं भी एक कठिन विभाग संभाल रहा हूं, जो संसाधनों की कमी से निरंतर जूझता रहता है।”
मणि ने जीएसटी के बारे में कहा कि इसमें राज्यों के लिए सुरक्षा की कई व्यवस्थाएं की गई हैं।
मणि ने कहा, “हमारे लिए सुरक्षा की जो व्यवस्था है, वह यह है कि इससे कर का आधार बढ़ सकता है, मौजूदा प्रणाली की खामी जीएसटी दर, राष्ट्रीय आईटी इंटरफेस से राज्यों और केंद्र के बीच सूचनाओं के निर्बाध प्रवाह से दूर हो सकती है और राज्यों को किसी सेवा कर कर लगाने का अधिकार दिया गया है।”
विधेयक के कानून बन जाने से पूरे देश में जीएसटी व्यवस्था लागू हो जाएगी ओर पूरा देश एक साझा बाजार बन जाएगा और राज्यों तथा केंद्र के अलग-अलग प्रकार के कई अप्रत्यक्ष करों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।
मणि ने कहा, “लोकसभा में पारित हो जाने के बाद उम्मीद है कि जल्द-से-जल्द यह राज्यसभा में भी पारित हो जाएगा, ताकि एक अप्रैल 2016 को इसे लागू करने का लक्ष्य पूरा हो सके।”
राज्य के मुख्यमंत्री ओमन चांडी शुक्रवार को बैठक को संबोधित करेंगे।
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