जेनेवा, 18 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने सोमवार को कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की तेजी से बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए हमें अपने प्रयासों को दोगुना करने की जरूरत है, जिनमें संक्रामक रोग, गैर संक्रामक रोग तथा स्वास्थ्य पर जलवायु परिवर्तन का असर शामिल है।
जेनेवा में सोमवार को 68वीं विश्व स्वास्थ्य सभा के अध्यक्ष का पदभार संभालने के बाद उन्होंने कहा, “हमलोग यह भूल जाते हैं कि स्वास्थ्य को प्रकृति के साथ एक करने के एक समग्र दृष्टिकोण, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा अति का त्याग करने की जरूरत है।”
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, “सार्वजनिक स्वास्थ्य की तेजी से बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए हमारे प्रयासों को दोगुना करने की जरूरत है, जिनमें संक्रामक रोग, गैर संक्रामक रोग, स्वास्थ्य पर जलवायु परिवर्तन का असर, सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और स्वास्थ्य संबंधी जीवन शैली को बढ़ावा देकर बीमारियों से बचना शामिल हैं।”
नड्डा ने अफ्रीका में इबोला प्रकोप तथा नेपाल में हालिया भूकंप की ओर इशारा किया, जिसने इस साल स्वास्थ्य मापदंडों को प्रभावित किया।
उन्होंने कहा कि मानवता के समक्ष मौजूद स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का जायजा लेने और इसके साथ ही हमारे संयुक्त प्रयासों की प्राथमिकता तय करने व रणनीति बनाने के लिहाज से यह अधिवेशन सदस्य देशों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, “स्वास्थ्य पर समग्र रूप से विचार करना आवश्यक है जिसमें प्रकृति, स्वास्थ्य संबंधी जीवन शैली अपनाना और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डालने वाली आदतों से बचना शामिल हैं।”
नड्डा ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले साल सितंबर में संयुक्त राष्ट्र की महासभा में योग को स्वास्थ्य एवं खुशहाली का उपयुक्त मार्ग मानने का आह्वान किया था।
उन्होंने कहा, “हमें यह सूचित करते हुए खुशी हो रही है कि संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है, जिसे 177 देशों का अनुमोदन शामिल है।”
मंत्री ने कहा कि ‘सभी में स्वास्थ्य’ नीतियों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर संस्थागत ढांचे के तहत बहु-क्षेत्रीय रुख अपनाने की जरूरत है। राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय दोनों ही स्तरों पर अंतर-निर्भरता की अहमियत को समझना और विभिन्न क्षेत्रों के बीच सहयोग आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जब तक हम सिविल सोसायटी और गैर-सरकारी संगठनों की भी क्षमताओं का लाभ नहीं उठाएंगे, तब तक अंतर-क्षेत्रीय सहयोग का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अंतर-निर्भरता को अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों में भी समाहित किया गया है।
नड्डा ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को 20 लाख डॉलर से अधिक के योगदान की घोषणा की।
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