भारतीय डिजाइनर बनारसी बुनकरों को देंगे वैश्विक पहचान

नई दिल्ली, 23 मई (आईएएनएस)। देश के दिग्गज फैशन डिजाइनर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी के बनारसी साड़ी बुनने वाले बुनकरों के कायाकल्प की पूरी तैयारी में हैं। ये डिजाइनर इन बुनकरों की आजीविका में सुधार करने और इसे वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री संतोष गंगवार और फैशन जगत के अन्य लोगों सहित डिजाइनर-राजनीतिज्ञ शायना एनसी और एफडीसीआई (भारतीय फैशन डिजाइन परिषद) के अध्यक्ष सुनील सेठी की इस सप्ताह की शुरुआत में हुई बैठक में हथकरघा उद्योग को मोदी के मेक इन इंडिया अभियान के तहत दोबारा जिंदा करने के प्रयासों पर चर्चा हुई।

प्रमुख डिजाइनर रितु कुमार ने कहा कि आज के कपड़ा उद्योग जगत में बनारस का हथकरघा विशेष स्थान रखता है और इसे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पेश करने की काबिलियत है।

कुमार ने आईएएनएस को बताया, “सिर्फ सोने और चांदी की कश्तकारी की हुई साड़ियां और अन्य उत्पाद भारतीय उपमहाद्वीप से बाहर जा रहे हैं। यह उन कपड़ों में से एक है, जो भारत की विशिष्टता (यूएसपी) है।”

उन्होंने कहा, “हैंडलूम के कपड़ों का व्यापक स्तर पर देश में शादी जैसे ग्लैमर वाले आयोजनों पर इस्तेमाल होता है। दूल्हे और दुल्हन दोनों के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। देश के औपचारिक पहनावे के रूप में भी इसका महत्वपूर्ण स्थान है।”

सरकार का प्रयास वाराणसी में कपड़ा उद्योग में सुधार करना और इस परियोजना में कार्यरत डिजाइनरों को सहयोग देना है। कम दरों पर धागे उपलब्ध कराना, रंगाई केंद्र स्थापित करना और व्यावसायिकता को बढ़ावा देने के लिए खरीदारों-बिक्रेताओं के बीच संबंधों को सहज बनाना है।

अब्राहम एंड ठाकोर के डिजाइनर डेविड अब्राहम ने कहा कि यदि सरकार और डिजाइनर मिलकर काम करें तो यह सपना अन्य हैंडलूम्स के लिए भी सच बन सकता है।

अब्राहम ने आईएएनएस को बताया, “बनारस की बुनकरी परंपरा विविधरंगी है और कई तरह के पहनावों के उपयुक्त तरह-तरह की तकनीक और रूप इसमें शामिल हैं।”

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