इस्लामाबाद, 12 जुलाई (आईएएनएस)। पाकिस्तान की मध्यस्थता में अफगानिस्तान सरकार और तालिबान के शीर्ष अधिकारियों के बीच हुई शांति वार्ता से दोनों पक्षों के बीच एक औपचारिक संवाद प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, सात जुलाई को इस्लामाबाद के पास मुरे शहर में हुई यह वार्ता बहुत महत्वपूर्ण रही, क्योंकि तालिबान विद्रोहियों और अफगानिस्तान सरकार के बीच लगभग 14 साल बाद पहली बार सीधी बातचीत हुई है।
तालिबान विदेशी फौजों की लंबे समय से मौजूदगी की वजह से लंबे समय से अफगानिस्तान सरकार के साथ सीधी वार्ता से इंकार करता आ रहा था।
सिन्हुआ के मुताबिक, वार्ता में उच्चस्तरीय भागीदारी से पता चलता है कि वे समस्या के राजनीतिक समाधान के लिए वार्ता के विकल्प का इस्तेमाल करने के इच्छुक हैं।
इस वार्ता का अन्य मुख्य पहलू यह है कि दोनों ही पक्षों ने चार घंटे तक चली इस वार्ता में इस प्रक्रिया को जारी रखने पर सहमति जताई।
सिन्हुआ के मुताबिक, अमेरिका और चीन के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुई इस चर्चा के दौरान दोनों पक्षों के बीच विश्वास का पता चला।
इस पहली सीधी बातचीत में हालांकि, कोई फैसला नहीं हो पाया। प्रतिनिधिमंडल ने अगले दौर की वार्ता के लिए मुख्य मुद्दों पर विचार साझा किए।
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