सुरक्षा परिषद के बाहर सुलझेंगे वैश्विक मुद्दे : भारत

अरुल लुईस

अरुल लुईस

संयुक्त राष्ट्र, 31 जुलाई (आईएएनएस)। भारत ने गुरुवार को कहा कि वैश्विक समस्याओं के समाधान सुरक्षा परिषद के बाहर महासभा जैसे मंच पर बेहतर तरीके से ढूंढ़े जा सकते हैं।

परिषद में छोटे विकासशील द्वीपीय देशों (एसआईडीएस) में शांति तथा सुरक्षा की चुनौतियों के मुद्दे पर चर्चा के दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि अशोक कुमार मुखर्जी ने कहा कि इनके समाधान के लिए यह स्पष्ट हो चुका है कि सुरक्षा परिषद के बाहर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग महत्वपूर्ण है, जहां लोकतांत्रिक, समावेशी और पारदर्शी रवैया अपनाया जा सकता है।

मुखर्जी ने समुद्री डकैती में अंतर्राष्ट्रीय प्रयास का उदाहरण देते हुए कहा, “हमें इन मुद्दों पर ध्यान देने के लिए सुरक्षा परिषद से बाहर देखने की जरूरत है। सुरक्षा परिषद ने भले ही समुद्री लूटपाट की समस्या को दो प्रस्तावों के जरिए सुलझाने का प्रयास किया है, लेकिन वास्तव में 60 सदस्यीय कांटैक्ट ग्रुप ऑन पायरेसी ऑफ द कोस्ट ऑफ सोमालिया के जरिए सुरक्षा तथा आर्थिक चिंताओं के मुद्दे पर ध्यान दिया है।”

उन्होंने कहा कि यह प्रभावी और पारदर्शी रवैया समुद्री लूट से निपटने में महासभा के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का एक मॉडल बन सकता है।

एक अन्य उदाहरण में उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के ‘कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सीज’ प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन तथा अवैध मत्स्य पालन जैसे मुद्दों से प्रभावी रूप से निपट रहा है। इस संस्था का गठन महासभा में कई दशकों की बातचीत के बाद हुआ है।

भारत सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली की आलोचना करता रहा है, जिसमें अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, रूस और फ्रांस स्थायी सदस्य हैं। इसमें सुधार तथा इसके विस्तार पर जोर डालते हुए नई दिल्ली ने इसे उदार तथा लोकतांत्रिक न होने का आरोप लगाया है।

मुखर्जी ने कहा कि भारत विकास, आधारभूत संरचना और जलवायु परिवर्तन को लेकर एसआईडीएस के साथ काम कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पैसिफिक एसआईडीएस के साथ संवाद के लिए फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आईलैंड्स कोऑपरेशन (एफआईपीआईसी) की शुरुआत की है और इसकी बैठक अगले महीने भारत में होगी।

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