स्कूल की कक्षाओं में सिलाई, शिल्पकला, पाक कला, घरेलू कामकाज और अन्य आवश्यक कार्यो पर जोर दिया जाएगा। विद्यार्थियों को श्रम के महत्व को अधिक करीब से समझाने के लिए खेतों, कारखानों और सेवा कंपनियों में प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
एमओई के मुताबिक, सभी स्कूलों के लिए स्कूली शिक्षा के दौरान विद्यार्थियों को श्रम शिक्षा देना अनिवार्य होगा। स्कूलों को विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करने के लिए कारीगर और तकनीशियन बुलाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
यह फैसला देश के युवाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जो बहुत कम घरेलू कार्य करते हैं। शैक्षणिक दबाव के कारण स्कूल अभिभावक भी बच्चों को घरेलू कामकाज से दूर रखते हैं, ताकि पढ़ाई से उनका ध्यान न भटके।
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