हाजी अली दरगाह

hajialiमुंबई में सबसे ज्यादा देखे जाने वाली जगहों में से एक हाजी अली की दरगाह सभी धर्मो के लोगों की आस्था का केंद्र है। इसी दरगाह में सैयद पीर हाजी अली शाह बुखारी की मजार है। हिंदू-इस्लामी शिल्प का यह एक शानदार नमूना है।

यह दरगाह सैयद बुखारी की याद में लगभग छह सौ साल पहले 1431 में बनाई गई थी। बुखारी तत्कालीन फारस साम्राज्य के बुखारा के निवासी थे और पंद्रहवीं सदी में दुनिया घूमने के बाद मुंबई में आकर बस गए थे। उनकी शख्सियत के साथ कई करिश्मे जोड़े जाते हैं। माना जाता है कि मक्का जाते हुए उनका इंतकाल हो गया था। हर शुक्रवार को यहां सूफी संगीत व कव्वाली की महफिल सजती है। बृहस्पतिवार और शुक्रवार को यहां सभी धर्मो के लगभग पचास हजार से ज्यादा लोग दुआ मांगने पहुंचते हैं।

दरगाह वर्ली इलाके में तट से पांच सौ मीटर दूर समुद्र में छोटे से टापू पर बनी है। वहां पहुंचने का पैदल रास्ता पानी से होकर है जो केवल समुद्र में भाटे के समय दिखता है। पानी जब चढ़ा हुआ होता है तो दरगाह पहुंचना मुमकिन नहीं हो पाता। यह इस दरगाह का खास आकर्षण है।

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