न्यूयॉर्क, 1 सितम्बर (आईएएनएस)। शोधकर्ताओं ने एक ऐसे जीन की तलाश की है जो लोगों को निकट दृष्टि दोष (मयोपिया) से ग्रस्त कर देता है।
14,000 लोगों पर किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि ऐसे लोग जिनमें एक खास तरह का एपीएलपी-2 नामक जीन पाया जाता है और जिन्होंने बचपन में अन्य लोगों की तुलना में एक घंटा या इससे अधिक पढ़ाई की थी, उन्हें किशोरावस्था में अन्य की तुलना में मयोपिया होने की संभावना पांच गुना अधिक होती है।
अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों में एपीएलपी-2 नामक जीन होता है, उनके लिए भी खतरा होता है, लेकिन कम समय पढ़ने में खर्च करने पर उन्हें मयोपिया होने का अतिरिक्त खतरा नहीं होता।
अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय चिकित्सा केंद्र से संबद्ध मुख्य अध्ययनकर्ता आंद्रेई कातचेंको ने कहा, “यह मयोपिया और जीन की पारस्परिक क्रिया का पहला ज्ञात प्रमाण है।”
शोधकर्ताओं का मानना है कि जीन वैरिएंट आंखों में एपीएलपी-2 प्रोटीन की मात्रा बढ़ा सकते हैं, जिसकी वजह से आंख का अत्यधिक बढ़ाव हो सकता है।
शोधार्थियों ने अध्ययन में एक चूहे को पढ़ाई वाले वातावरण में रखा। उसकी आंख में एपीएलपी-2 प्रोटीन कम था। यह पाया गया कि उसे मयोपिया होने की संभावना कम है।
कातचेंको ने कहा, “आंख में एपीएलपी-2 घटा कर आप माहौल से पैदा होने वाले मयोपिया की आशंका को कम कर सकते हैं। यह तथ्य हमें हर लोगों को मयोपिया से बचाने वाले इलाज का तरीका ढूंढ़ने में मदद देगा, फिर चाहे एपीएलपी-2 का जो भी प्रकार उनके शरीर में मौजूद हो।”
इस इलाज के तरीके को ढूंढ़ने में सालों लग सकते हैं। शोध करने वालों को अभी तक यह नहीं पता चल सका है कि एपीएलपी-2 के स्तर को लोगों में कैसे घटाया जा सकता है।
यह अध्ययन पीएलओएस जेनेटिक्स नाम की पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
dharmpath.com dharmpath