ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में हिस्ट्री एंड पॉलिटिक्स ऑफ मॉडर्न चाइना के प्रोफेसर राना मित्तर का कहना है, “मुझे लगता है कि द्वितीय विश्वयुद्ध की जीत में चीन की महत्वपूर्ण भूमिका है।” मित्तर ‘फॉरगॉटन एलाइ : चाइनाज वर्ल्ड वार 2, 1937-1945’ पुस्तक के लेखक हैं।
इस पुस्तक में द्वितीय विश्वयुद्ध में जापानी आक्रमण के खिलाफ चीन के आठ साल के प्रतिरोध का ऐतिहासिक ब्योरा पेश किया गया है। मित्तर ने लंदन में चीनी दूतावास में अपने भाषण में कहा कि चीन के बिना एशिया में जीत काफी मुश्किल होती।
आधिकारिक आकंड़ों से पता चलता है कि चीन में उस समय लगभग 18.6 लाख जापानी सैनिक लड़ रहे थे, जो इसकी कुल संख्या का पचास प्रतिशत है। चीनी सैनिकों ने जापानी आक्रमणकारियों को धूल चटा दी थी।
मित्तर ने कहा, “चीन के अभूतपूर्व योगदान और उसके संघर्ष अब पश्चिमी चिंतकों के लिए रोचक होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों को चीन के योगदान को सही कारणों से याद रखने की जरूरत है। उनका कहना है कि यदि चीन 1938 के युद्ध में भाग नहीं लेता तो युद्ध की अवधि और इसके परिणाम अलग होते।
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