चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता होंग ली ने शनिवार को कहा, “हम जापान से अतीत से सीख लेने, अपने नागरिकों तथा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की बात सुनने और पड़ोसी देशों की सुरक्षा चिंताओं पर ध्यान देने का अनुरोध करते हैं।”
नए विधान के तहत जापान एक स्थाई कानून बनाएगा, जिससे वह अंतर्राष्ट्रीय शांति अभियानों में विदेशी सेनाओं की मदद के लिए अपने आत्म रक्षा बलों को भेजने में सक्षम होगा। इसके साथ ही अन्य 10 मौजूदा सुरक्षा संबंधी कानूनों में भी संशोधन किया जाएगा।
जापान ने हाल ही में अपने सैन्यबलों का विस्तार किया है और अपनी सैन्य एवं सुरक्षा नीतियों को संशोधित किया है।
प्रवक्ता ने कहा कि इससे संदेह पैदा होता है कि क्या जापान अपनी रक्षात्मक नीति और शांतिपूर्ण विकास मार्ग को त्याग देगा?
उन्होंने कहा, “सैन्य व सुरक्षा क्षेत्रों में जापान की नीतियों और कदमों पर एशियाई देश तथा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय नजर बनाए रखेंगे।”
होंग ने जापान से शांतिपूर्ण विकास मार्ग की नीति का अनुसरण करने और सैन्य सुरक्षा क्षेत्र में विवेक से कार्य करने, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने में मदद करने की दिशा में अधिक प्रयास करने का आग्रह किाय है।
जापान के संविधान के 90 प्रतिशत से अधिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह विधान जापान के सर्वोच्च कानून का सीधा-सीधा उल्लंघन है।
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