कोलकाता, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। देश का वस्त्र निर्यात 2015 में बढ़कर 18 अरब डॉलर और 2016 में 20 अरब डॉलर का होगा, जो 2014 में 16.5 अरब डॉलर का था। यह बात एक सर्वेक्षण रपट में कही गई है।
क्रेडिट रेटिंग एजेंसी आईसीआरए की एक रपट के मुताबिक, देश के वस्त्र निर्यात में वृद्धि की संभावना का आधार यह है कि इस दौरान वैश्विक वस्त्र व्यापार में वृद्धि होगी और रुपये के अवमूल्यन का भी इसमें सकारात्मक असर रहेगा।
कंपनी ने एक बयान में कहा, “रुपये के अवमूल्यन का असर हालांकि लंबे समय तक रहने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि गत तीन साल में रुपये के अवमूल्यन से वैश्विक व्यापार में भारती की बाजार हिस्सेदारी में विशेष बदलाव नहीं हुआ है।”
वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी जो 2004 में तीन फीसदी थी, वह थोड़ी ही वृद्धि के साथ 2014 में सिर्फ चार फीसदी रही।
रपट के मुताबिक, विश्व व्यापार संगठन की कपड़ा और वस्त्र संबंधी नई व्यापार व्यवस्था का जहां चीन, बांग्लादेश और वियतनाम ने फायदा उठाया है और वैश्विक वस्त्र व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है, वहीं भारत की हिस्सेदारी मामूली स्तर पर बनी हुई है, जबकि भारत कपास और मानव निर्मित फाइबर का सबसे बड़ा उत्पादक है।
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