वाशिंगटन, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिका के अलबामा में दो पुलिस अफसरों ने गवाही दी है कि उनके साथी एक पुलिस अफसर के हाथों प्रताड़ना सहने वाले भारतीय बुजुर्ग ने पुलिस को किसी तरह की धमकी नहीं दी थी।
सुरेशभाई पटेल नामक यह बुजुर्ग अपने पौत्र की देखभाल करने अमेरिका आए थे। यहां आने के कुछ दिन बाद ही उन्हें एक पुलिसवाले एरिक पार्कर के हाथों जुल्म का शिकार होना पड़ा था।
एक निर्णायक मंडल द्वारा इस मामले में सर्वसम्मत फैसला नहीं देने के बाद मामले की फिर से सुनवाई हो रही है। इसी के तहत दो पुलिस अफसरों की बुधवार को गवाही दर्ज की गई।
मैडिसन के पुलिस अधिकारी चार्ल्स स्पेन्स ने हंट्सविले अदालत से कहा कि पटेल ने किसी तरह की धमकी नहीं दी थी।
ए वन डॉट कॉम के अनुसार, आधिकारी क्लिंट हारेल ने कहा, “पटेल का कोई आपराधिक व्यवहार ऐसा नहीं था, जिसे दर्ज कराया जाए।” उन्होंने कहा कि संदेह का कोई ऐसा आधार नहीं था जो पटेल के गिरहबान पर हाथ डालने को मजबूर करता।
स्पेन्स ने बताया कि एक पड़ोसी ने पुलिस को फोन किया कि एक ‘अश्वेत आदमी’ मैडिसन में घरों के पास घूम रहा है और गैरेजों में झांक रहा है।
स्पेन्स ने कहा कि जब वह घटनास्थल पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि पार्कर ने पटेल को पकड़ा हुआ है। स्पेन्स ने कहा कि पटेल ने खुद को छुड़ाने के लिए अधिकारियों को धक्का नहीं दिया था।
सहायक अमेरिकी अटार्नी राबर्ट पोजी ने स्पेन्स से पूछा, “क्या आपने कुछ ऐसा देखा था जिससे लगे कि बल का प्रयोग जरूरी है?” जवाब में स्पेन्स ने कहा, “नहीं, सर।”
बचाव पक्ष ने दलील दी हुई है कि पटेल ने अपना हाथ अफसर के पास से हटाया था और ऐसा लगा था कि वह जेब से हथियार निकालने जा रहे हैं।
पटेल का भी बयान बुधवार को दर्ज हुआ। वह व्हीलचेयर से अदालत पहुंचे। उन्होंने गुजराती में अपनी बात कही, जिसे अनुवादक ने अंग्रेजी में अनुवाद किया।
पटेल ने कहा, “मैं वहां अपने पौत्र के साथ खेलने गया था। 10 से 11 घर तक चला था, लेकिन किसी के अहाते में नहीं गया था।” पटेल की बात से लगा कि वह फुटपाथ पर चल रहे थे।
पटेल ने कहा कि कोई चीखा था और वह रुक गए थे। पुलिस आई तो उन्होंने कहा भी ‘नो इंग्लिश’ और ‘इंडियन’। उन्होंने घर की तरफ इशारा कर ‘माई हाउस’ भी कहा था। उन्होंने भागने की कोशिश नहीं की थी।
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