अरुण कुमार
अरुण कुमार
वाशिंगटन, 5 नवंबर (आईएएनएस)। भारतीय बुजुर्ग को जमीन पर पटकने के मामले में निर्णायक मंडल एक बार फिर किसी सर्वसम्मत नतीजे पर नहीं पहुंच सका है। इस वजह से अमेरिका की एक संघीय अदालत ने मामले में ‘मिसट्रायल’ (गलत मुकदमे) का ऐलान किया है। इससे पहले भी मामले में ‘मिसट्रायल’ का ऐलान किया गया था।
इस मामले में आरोप है कि मैडिसन के पुलिस अफर एरिक पार्कर (27) ने इसी साल फरवरी में भारतीय बुजुर्ग सुरेशभाई पटेल को संदिग्ध समझ कर उन पर जरूरत से कहीं अधिक बल का प्रयोग किया था। उन्हें जमीन पर पटक दिया था। इस वजह से पटेल की रीढ़ की हड्डी में ऐसी चोट लगी कि वह व्हीलचेयर पर पहुंच गए।
पटेल का कहना है कि उन्होंने अफसर को बताने की कोशिश की थी कि उन्हें अंग्रेजी नहीं आती। उन्होंने किसी भी तरह से अफसर को धक्का देने की कोशिश नहीं की थी। उंगली के इशारे से अपने घर के बारे में भी बताया था। पटेल इस घटना से कुछ ही दिन पहले अपने पोते की देखभाल करने के लिए अमेरिका आए थे।
बचाव पक्ष की मामले में दलील है कि पटेल ने जिस तरह का शारीरिक हावभाव दिखाया था उससे पार्कर को उन पर काबू पाने के लिए बाध्य होना पड़ा था। बचाव पक्ष ने यह भी कहा था कि अंग्रेजी नहीं आने की बात नहीं मानी जा सकती। जो अमेरिका आ रहा है, उसे यहां के कानून और भाषा से परिचित होना ही चाहिए।
मामले के पहले निर्णायक मंडल ने 11 सितंबर को कोई सर्वसम्मत फैसला न देते हुए 2 के मुकाबले 10 मतों से पार्कर को इलजाम से बरी कर दिया था। इसके बाद फिर से मुकदमा चलाने का आदेश दिया गया था।
लेकिन, दोबारा चला मुकदमा भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका। ए वन डॉट कॉम के मुताबिक निर्णायक मंडल ने हंट्सविले की संघीय अदालत की न्यायाधीश मैडलिन ह्यूज हैकाला से कहा कि बहुत गहन विचार विमर्श के बाद भी वह किसी नतीजे पर पहुंचने में नाकाम रहा है। इस पर न्यायाधीश ने मामले में ‘मिसट्रायल’ घोषित कर दिया।
ए वन डॉट कॉम ने अभियोजन पक्ष के वकील राबर्ट पोजी के हवाले से बताया कि बचाव पक्ष के वकील राबर्ट टूटेन ने मिसट्रायल के बाद अदालत से पार्कर को बरी करने का आग्रह किया है।
अभियोजन पक्ष मामले में तीसरी बार मुकदमा चलाने के बारे में विचार कर रहा है। पोजी ने कहा, “मैं इस मामले में अपने पक्ष के सही होने के बारे में मजबूती से सोचता हूं। यह ऐसी बात है जिस पर हम विचार करेंगे।”
पार्कर के खिलाफ सरकार की तरफ से भी आपराधिक हमले का मामला दर्ज है। यह मामला अभी लंबित है। इसका भविष्य संघीय अदालत में चल रहे मामले के फैसले से जुड़ा हुआ है।
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