काठमांडू, 8 नवंबर (आईएएनएस)। यूनीसेफ ने नेपाली बच्चों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है, क्योंकि वहां अधिक मानवीय संकट की संभावना बनी हुई है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, यूनिसेफ के कार्यकारी निदेशक एंथनी लेक ने शनिवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में 25 अप्रैल को आए भयानक भूकंप से उजड़े बच्चों की दशा पर और अब राष्ट्रीय संकट का सामना कर रहे बच्चों की दशा पर चिंता व्यक्त की है।
लेक ने बयान में कहा, “देश के तराई मैदानों राजनीतिक संकट के कारण स्कूलों की बंदी और गैस, भोजन सामग्री और दवाइयों की कमी हो गई है और पूरे देश में ईंधन की समस्या पैदा हो गई है। इन सबके कारण बच्चों का जीवन प्रभावित हो रहा है।”
लेक नेपाल की दो-दिवसीय यात्रा पर थे। उन्होंने कहा, “भूकंप के बाद बनाए गए अस्थायी आश्रय आने वाली सर्दियों में पर्याप्त सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकते हैं। कम बारिश के कारण फसलें कमजोर हैं। दवाओं की कमी के कारण आने वाले ठंड के महीनों में निमोनिया जैसी बीमारियों से निपटने में कठिनाई होगी। एक नए मानव संकट से घिर सकते हैं।”
यूनिसेफ ने आने वाली सर्दियों के बारे में ही नहीं, बल्कि भविष्य के बारे में भी सोचने की अपील ही है।
यूनिसेफ ने नेपाल के दक्षिणी मैदानी इलाकों में स्कूलों की बंदी पर भी अपनी चिंता व्यक्त की है, जहां लगभग पांच लाख बच्चे विरोध प्रदर्शनों के कारण स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।
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