गुड़गांव, 20 नवंबर (आईएएनएस)। आज के समय में देश संबंधी जोखिम, व्यवस्था संबंधी जोखिम और कारोबारी जोखिम एवं अन्य प्रकार के जोखिमों के विश्लेषण से बड़ी परियोजनाओं में बिल्कुल अलग परिणाम निकल सकते हैं। लेकिन देश में ऐसे विश्लेषकों की भारी कमी है और इसी कमी को पूरा करने के लिए बीएमएल मुंजाल यूनिवर्सिटी ने इस साल एमबीए कोर्स के एक हिस्से के तौर पर एनालाइजिंग एंड मिटिगेटिंग रिस्क की शुरुआत की है।
इस नए पाठ्यक्रम पर बीएमयू के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के डीन डॉ. तपन पांडा ने कहा, “एनालाइजिंग एंड मिटिगेटिंग रिस्क’ जोखिम प्रबंधन के बारे में संपूर्ण ज्ञान देता है जो वित्तीय जोखिम प्रबंधन (एफआरएम) से कहीं अधिक है।”
उन्होंने कहा, “यह पाठ्यक्रम बिजनेस स्कूल के चार शिक्षक पढ़ाएंगे और जिसमें इंजीनियरिंग जोखिम से संबंधित प्रोजेक्ट होगा, हम अपने स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टैक्नोलॉजी से उपयुक्त शिक्षकों की मदद भी लेंगे।”
सामान्यतया जोखिम प्रबंधन के पारंपरिक पाठ्यक्रम मुख्य रूप से वित्तीय जोखिम पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जबकि आज समय बदल गया है।
पांडा ने कहा कि इसे इस तरह समझा जा सकता है कि ईरान से भारत तक गैस लाने के लिए जमीन के रास्ते से एक पाइपलाइन का निर्माण करना हो तो देश संबंधी जोखिम में भारत-पाकिस्तान संबंधों का विश्लेषण जरूरी साबित हो सकता है। व्यवस्था संबंधित जोखिम में अफगानिस्तान की स्थिरता का विश्लेषण शामिल हो सकता है।
ऐसे में अगर इस परियोजना का विश्लेषण वित्तीय जोखिम प्रबंधन के अनुसार किया जाए तो उचित समाधान नहीं मिलते। ऐसे ही संपूर्ण दृष्टिकोण को इंटरप्राइज रिस्क मैनेजमेंट कहते हैं और बीएमयू भारत में इस विषय को पढ़ाने वाले विश्वविद्यालयों में सबसे अग्रणी है।
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