कुआलालंपुर, 23 नवंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मलेशिया दौरे के तीसरे दिन सोमवार को यहां हिंदू और बौद्ध मंदिरों के लिए एक पारंपरिक प्रवेश द्वार ‘तोरण द्वार’ का उद्घाटन कर मलेशिया के साथ भारत के सांस्कृतिक संबंधों पर रोशनी डाली।
मोदी ने यहां ब्रिकफील्ड्स में मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रजाक संग मिलकर संयुक्त रूप से तोरण द्वार का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा, “यह तोरण पत्थर पर सिर्फ एक कलाकारी नहीं है। यह दो देशों को जोड़ता है और उनकी महान संस्कृतियों की मिसाल देता है।”
ब्रिकफील्ड्स स्थानीय स्तर पर ‘लघु भारत’ नाम से मशहूर है।
मोदी ने कहा कि सर्वप्रथम सम्राट अशोक ने मध्य प्रदेश में प्रवेश द्वार बनवाया था और उसे भगवान बुद्ध को समर्पित किया था।
वहीं, उनके मलेशिया के समकक्ष रजाक ने प्रवेश द्वार को भारत-मलेशिया की दोस्ती का प्रतीक बताया।
रजाक ने कहा, “तोरण द्वार भारत-मलेशिया की दोस्ती का प्रतीक है। यह सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक को एक प्रवेश द्वार प्रदान करता है।”
मोदी ने कहा कि भगवान बुद्ध का संदेश पूरे एशिया में गूंजता है और नव उद्घाटित तोरण द्वार मलेशिया एवं भारत के रिश्तों में एक मील का पत्थर है।
मोदी ने कहा, “मुझे यकीन है कि आने वाले समय में भारत और मलेशिया के संबंध और मजबूत एवं गहरे होंगे।”
उन्होंने कहा, “तोरण द्वार का उद्घाटन दिखाता है कि भारत-मलेशिया के संबंध आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक भी हैं।”
राजधानी कुआलालंपुर में स्थित यह प्रवेश द्वार सांची स्तूप के डिजाइन से प्रेरित है और इसके निर्माण का पूरा खर्च भारत ने उठाया है।
मलेशिया की करीब तीन करोड़ की आबादी में से 20 लाख लोग भारतीय मूल के हैं।
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