इस्लामाबाद, 24 नवंबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान में एक मानवाधिकार संगठन ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से लकवे के शिकार एक मुजरिम की फांसी को निलंबित करने का आग्रह किया है। इसे बुधवार को फांसी दी जानी है।
अब्दुल बासित (43) नामक इस मुजरिम के कमर से नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त है। उसके एक महिला से संबंध थे। बासित को 2009 में इस महिला के चाचा की हत्या का दोषी पाया गया था। बासित ने इस इलजाम को गलत बताया था।
डॉन ऑनलाइन की रपट के मुताबिक, शरीफ को भेजे एक पत्र में पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग की अध्यक्ष जोहरा यूसुफ ने कहा है कि जेल अधिकारी अभी भी संघीय सरकार को भेजे गए अपने उस पत्र के जवाब का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने इस मामले में आगे की कार्रवाई के बारे में पूछा है।
जोहरा ने लिखा है, “यह हैरत में डालने वाला है कि बासित की फांसी के सिलसिले में तीसरी बार आदेश जारी किया गया है। जबकि, उसकी फांसी की वैधानिकता पर जताई गई चिंताएं पहले की ही तरह बनी हुई हैं और इसलिए भी कि वह फांसी दिए जाने वालों की श्रेणी में आता ही नहीं है।”
यह तीसरी बार है, जब बासित की फांसी का वारंट जारी हुआ है। इससे पहले उसे 29 जुलाई को फांसी दी जानी थी। लेकिन, मामले की वैधानिकता पर सवाल उठाए जाने के बाद लाहौर उच्च न्यायालय ने फांसी रोक दी थी।
लाहौर उच्च न्यायालय में बासित की फांसी के खिलाफ दायर याचिका खारिज हो गई थी। इसके बाद 22 सितंबर को उसकी फांसी का फिर वारंट जारी हुआ। लेकिन, सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर रोक लगा दी थी।
अब बासित को बुधवार को फांसी दिए जाने का आदेश जारी हुआ है।
पाकिस्तान में 2014 में फांसी की सजा पर से रोक हटाए जाने के बाद 200 लोगों को फांसी दी जा चुकी है। यह रोक पेशावर के स्कूल पर आतंकवादियों के हमले 150 लोगों की मौत के बाद हटाई गई थी। हमले में मरने वालों में अधिकांश बच्चे थे।
पाकिस्तान की जेल नियमावली में विकलांग कैदियों को फांसी दिए जाने के बारे में कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए गए हैं।
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