पेरिस समझौते के सकारात्मक, नकारात्मक पक्ष

पेरिस, 13 दिसम्बर (आईएएनएस)। जलवायु परिवर्तन पर पेरिस सम्मेलन में शनिवार शाम 196 देशों द्वारा किए गए समझौते के सकारात्मक और नकारात्मक पक्ष इस प्रकार हैं :

– समझौते में ग्लोबल वार्मिग को औद्योगिक क्रांति से पहले के वैश्विक तापमान से अधिकतम दो फीसदी और यहां तक 1.5 फीसदी वृद्धि में सीमित करने का संकेत।

– 2050 तक यह सुनिश्चित करने की उम्मीद कि मानव निर्मित उत्सर्जन उतना ही हो, जितना पेड़ और समुद्र सोख सकें।

– विकासशील देशों को स्वच्छ ईंधन और प्रौद्योगिकी अपनाने में मदद करने के लिए समृद्ध देशों द्वारा 2020 से सालाना 100 अरब डॉलर देने पर सहमति।

– समझौता 2020 से लागू होगा, लेकिन लक्ष्य की दिशा में अभी से काम शुरू।

– सम्मेलन में करीब 100 फीसदी उत्सर्जन के जिम्मेदार 188 देशों ने ‘इंटेंडेड नेशनल डिटरमिंड कंट्रीब्यूशंस’ दस्तावेज जमा कर अपनी ओर से की जाने वाली पहल का प्रस्ताव रखा।

– समझौते में साझा लेकिन विविध जिम्मेदारी के सिद्धांत को जगह। विकासशील देशों की यह प्रमुख मांग थी।

– सदस्य देशों द्वारा 2030 टिकाऊ विकास एजेंडा लागू करने के लिए तैयार रहने की प्रतिबद्धता। एजेंडे को सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपनाया था।

– इसमें वैधानिक रूप से बाध्यकारी और स्वैच्छिक दोनों तरह के प्रावधान हैं, लेकिन विश्वास और भरोसा बनाने के लिए पारदर्शी प्रारूप है।

– समझौते को लागू नहीं करने वाले देशों पर जुर्माना नहीं, लेकिन इसमें यह उम्मीद जताई गई है कि कोई भी देश इसे लागू करने से विमुख नहीं होगा। इसे समुचित लचीला रखा गया है।

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