नई दिल्ली, 14 दिसम्बर (आईएएनएस)। कॉल ड्रॉप पर भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) की मुआवजा नीति पर स्थगनादेश जारी करने की मांग के साथ दूरसंचार कंपनियों द्वारा दाखिल की गई याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और ट्राई का जवाब मांगा है।
मुआवजा नीति के तहत प्रत्येक कॉल ड्रॉप के लिए मोबाइल उपभोक्ता के मोबाइल खाते में कंपनी के खाते से एक रुपये जमा हो जाएगा। ऐसा दिन में अधिकतम तीन बार होगा। यह योजना जनवरी 2016 से शुरू होगी।
याचिका दो दूरसंचार उद्योग संघों -सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया और एसोसिएशन ऑफ यूनीफाइड टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया- ने दाखिल की है।
मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी और न्यायमूर्ति जयंत नाथ ने केंद्र और ट्राई से 22 दिसंबर तक जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
कंपनियों ने याचिका में ट्राई के 16 अक्टूबर को दिए आदेश को नुकसानदेह बताया और इसे खारिज करने की मांग की।
कंपनियों ने कहा कि ट्राई के पास ट्राई अधिनियम के तहत आखिरी उपभोक्ता को मुआवजा देने का अधिकार नहीं है। इसलिए यह आदेश अवैध है।
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