भारत-पाकिस्तान के बीच शांति के लिए श्रद्धालुओं ने प्रार्थना की

इस्लामाबाद, 14 दिसम्बर (आईएएनएस)। भारत से पाकिस्तान आए श्रद्धालुओं ने कटास राज मंदिर में भारत और पाकिस्तान के बीच स्थाई शांति और अच्छे रिश्तों के लिए प्रार्थना की।

समाचार-पत्र ‘डॉन’ की वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को कटास राज मंदिर में हुए समारोह में शामिल सुषमा गुप्ता ने कहा, “मैं उस दिन का इतंजार कर रही हूं, जब दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों के लोग बिना किसी डर के एक-दूसरे की धरती पर सुबह की सैर (मार्निग वॉक) करेंगे।”

सुषमा भारत से आए 124 श्रद्धालुओं के जत्थे में शामिल हैं। यह जत्था शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा के बीच पंजाब के चकवाल जिले के कटास गांव के कटास राज मंदिर में पहुंचा।

सुषमा ने कहा, “पाकिस्तान के लिए रवाना होने के बाद पूरे रास्ते हममें यह जिज्ञासा थी कि पता नहीं हमारा स्वागत कैसे होगा, और यह कि पाकिस्तान कैसा होगा। लेकिन, जब हम वाघा पहुंचे तो जिस प्यार और गर्मजोशी से हमारा स्वागत हुआ, उससे हम भौंचक्के रह गए।”

उन्होंने कहा, “यहां सब कुछ अपने जैसा है। हमारी भाषा, संस्कृति, पहनावा और खेत, सभी कुछ एक जैसे।”

मंदिरों के परिसर में शुक्रवार रात को सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। इसमें सिंध के हिंदू कलाकारों ने भजन पेश किए।

संत लाल शहबाज कलंदर की रचनाओं को खास कर सराहा गया।

शरणार्थी न्यास संपत्ति बोर्ड के अध्यक्ष मोहम्मद सिद्धीक फारूक ने शनिवार को समारोह में कहा कि दोनों देशों के आम लोग दोनों देशों के बीच चिरस्थाई शांति और प्रेम की कामना करते हैं। यह तभी संभव होगा जब सरकारें शांति हासिल करने के लिए व्यावहारिक कदम उठाएंगी।

उन्होंने कहा, “सही है कि विभाजन ने दोनों देशों के लोगों को ऐसे नुकसान पहुंचाए, जिनकी कभी भरपाई नहीं हो सकती। लेकिन, विभाजन एक हकीकत है। हमें इस अटल सत्य को मानना होगा और आगे बढ़ना होगा। आगे बढ़ने का सबसे बेहतर तरीका यही होगा कि हम अपने दिलों को एक-दूसरे के लिए खोल दें। “

फारूक ने कहा कि कटास राज मंदिर में सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि यह बताते हुए खुशी हो रही है कि बीते साल दिसंबर में 85 श्रद्धालु यहां आए थे, जबकि इस बार 124 आए हैं। भविष्य में यह संख्या और बढ़ाई जाएगी।

श्रद्धालुओं के जत्थे की अगुवाई करने वाले शिव प्रताप बजाज ने कहा कि पाकिस्तान में मिले प्रेम और स्नेह को वह कभी भूल नहीं पाएंगे।

उन्होंने कहा, “बीते साल दिसंबर में मैंने श्रद्धालुओं के लिए ठहराव स्थल बनाने की मांग की थी। इस बार मुझे यह देखकर बेहद खुशी हुई कि यह बन रहा है।”

श्रद्धालुओं को उपहार भी दिए गए।

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