इस्लामाबाद, 14 दिसम्बर (आईएएनएस)। तापी गैस पाइपलाइन परियोजना की शुरुआत का अर्थ है कि पाकिस्तान और भारत की ऊर्जा जरूरतें काफी हद तक पूरी हो जाएंगी।
समाचार पत्र ‘द नेशन’ में ‘तापी कंस्ट्रक्शन बिगिन्स’ के शीषर्क से प्रकाशित एक संपादकीय के मुताबिक, अपने सूत्रपात के 25 वर्षो के बाद तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत (तापी) पाइपलाइन आखिरकार शुरू हो रहा है।
प्रधानमंत्री नवाज शरीफ दक्षिणपूर्वी तुर्कमेनिस्तान के शहर मैरी के नजदीक इस 10 अरब डॉलर की परियोजना के शिलान्यास समारोह में रविवार को शामिल हुए, जहां तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति गुरबांगुली बर्दीमुखमेदोव, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी और भारतीय उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी भी उपस्थित थे।
संपादकीय के मुताबिक, “परियोजना की शुरुआत का अर्थ है कि पाकिस्तान और भारत की ऊर्जा जरूरतें काफी हद तक पूरी हो जाएंगी और साथ ही इस पाइपलाइन का अधिक व्यापक प्रभाव भी होगा।”
संपादकीय के मुताबिक, “हालांकि अफगानिस्तान और उत्तर पश्चिमी पाकिस्तान के कुछ हिस्से असुरक्षित हैं, लेकिन चारों देशों की सरकारों को लगता है कि पाइपलाइन इस खतरे को झेल सकती है।”
संपादकीय के मुताबिक, “जिस तरह से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीइपीसी) की सुरक्षा के मुद्दे ने सेना को उइगर आतंकवादियों वाले उत्तर के क्षेत्रों का सफाया करने को बाध्य किया, उसी प्रकार पाइपलाइन का निर्माण सभी देशों को उन क्षेत्रों की सुरक्षा-व्यवस्था दुरुस्त करने को बाध्य करेगा, जहां से यह पाइपलाइन गुजरेगी।”
संपादकीय ने तमाम मुश्किलों के बावजूद परियोजना पर टिके रहने के लिए चारों देशों की प्रशंसा की है।
संपादकीय के मुताबिक, “क्षेत्रीय सामंजस्य ऐसी आर्थिक परियोजनाओं पर निर्भर है, जो देशों को आपस में जोड़े और जिनके कारण देशों की परस्पर निर्भरता बढ़े और उनके बीच वैर-भाव और अविश्वास खत्म हो।”
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