सार्वजनिक सुनवाई में अपना अपराध स्वीकार करने के कारण पू झिकियांग को कड़ी सजा नहीं दी गई। अपराधी ने सजा स्वीकार करते हुए कहा कि वह सजा के खिलाफ याचिका दायर नहीं करेगा।
अदालत का कहना है कि पू ने 2012 से 2014 के दौरान सोशल नेटवर्किं ग साइट वीबो पर भड़काऊ पोस्ट के जरिए जातीय घृणा को भड़काने की कोशिश की।
अदालत ने कहा कि पू ने वेब प्रशासक की ओर से बार-बार दी जा रही चेतावनी के बावजूद भड़काऊ सामग्री पोस्ट करना जारी रखी, जिससे जातीय घृणा फैलाने की उसकी मंशा का पता चलता है। 2011 में पू ने अपनी माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट पर चार बार आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट की। इससे न सिर्फ लोग मनोवैज्ञानिक रूप से परेशान हुए बल्कि नकारात्मक सामाजिक प्रभाव भी पड़ा।
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