काबुल, 25 दिसम्बर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफगानिस्तान की राजधानी में शुक्रवार को संसद की नई इमारत के उद्घाटन के दौरान सीमा पार से आतंकवाद के खात्मे का आह्वान किया।
पाकिस्तान का नाम लिए बिना मोदी ने यहां की संसद में दिए अपने संबोधन में कहा, “अफगानिस्तान तभी सफल राष्ट्र होगा, जब सीमा पार से आतंकवादी गतिविधियां बंद हो जाएंगी, आतंकवादियों के प्रशिक्षण स्थल व अड्डे खत्म हो जाएंगे और उनके संरक्षक अपनी गतिविधियां बंद कर देंगे।”
उन्होंने कहा, “अफगानिस्तान का भविष्य संवारने के लिए आतंकवाद व हिंसा कोई औजार नहीं हो सकता। अफगानियों को विकल्प चुनने का हुक्म देकर भी देश का भविष्य नहीं संवारा जा सकता।”
रूस के दो दिवसीय दौरे के बाद मोदी शुक्रवार सुबह काबुल पहुंचे।
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के साथ मोदी ने अफगानिस्तान की नई संसद की इमारत का उद्घाटन किया, जो भारत द्वारा 90 लाख अमेरिकी डॉलर की राशि के सहयोग से निर्मित हुआ है। इमारत के एक खंड का नाम भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखा गया है।
गनी ने एक ट्वीट में कहा, “लोकतंत्र की एक नई इमारत देने के लिए भारत को बहुत धन्यवाद। यह हमारी मित्रता का प्रमाण है।”
अपने संबोधन में मोदी ने कहा, “कुछ ऐसे लोग हैं, जो नहीं चाहते हैं कि हम यहां हों।”
उन्होंने कहा, “जो लोग बाहर से युद्ध छेड़ रहे हैं, उन्हें इस इमारत और इस हॉल तक पहुंचने का रास्ता ढूंढना चाहिए।”
उन्होंने कहा, “जो बंदूक के बल पर क्षेत्र की मांग कर रहे हैं, उन्हें मत की ताकत का सहारा लेना चाहिए। जिन्होंने घरों को उजाड़ा है, उन्हें अब राष्ट्र निर्माण के लिए आगे आना चाहिए।”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अफगानिस्तान की सफलता के लिए इसके पड़ोसियों का सहयोग और समर्थन की जरूरत है।
उन्होंने कहा, “जब अफगानिस्तान क्षेत्र में शांति का स्वर्ग और विचारों, वाणिज्य, ऊर्जा व निवेश का केंद्र बन जाएगा, हम सब आपस में समृद्ध हो जाएंगे।”
मोदी ने कहा, “यही कारण है कि हम ईरान में चाहबहार के माध्यम से भूमि व समुद्र में आपके संपर्क को सुधारने के काम में लगे हैं।”
मोदी ने यह भी उम्मीद जताई कि पाकिस्तान, दक्षिण एशिया व अफगानिस्तान तथा अन्य के बीच सेतु का काम करेगा।
उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि जल्द ही वह दिन आएगा, जब मध्य एशिया की ऊर्जा हमारे क्षेत्र में समृद्धि लाएगी।”
उन्होंने कहा कि मानव संसाधन की तुलना में कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है। उन्होंने शहीद हो चुके सुरक्षाकर्मियों के बच्चों को 500 भारतीय छात्रवृत्ति की घोषणा की।
एक संयुक्त बयान जारी करते हुए गनी ने कहा कि शांति के लिए गंभीर चुनौतियों के रूप में आतंकवाद, मादक पदार्थो व अतिवाद को चिन्हित करते समय अफगानिस्तान को आतंकवादियों के पनाह स्थलों व सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने की जरूरत है।
बयान के मुताबिक, “अफगानिस्तान में हाल के महीनों में आतंकवाद की बर्बर घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए दोनों नेताओं ने इस बात को दोहराया कि अफगानिस्तान में शांति के लिए आतंकवाद के बढ़ावे को समाप्त करने और सुरक्षित स्थानों से उसके समर्थन को बंद करने की जरूरत है।”
मोदी ने अफगानिस्तान की एकता, क्षेत्रीय अखंडता व सुरक्षा को सुनिश्चित करने में भारत के पूर्ण समर्थन की बात दोहराई।
बयान में भारत द्वारा दिए जा रहे एमआई-25 हेलीकॉप्टरों की भी चर्चा की गई और दोनों पक्षों ने अफगानिस्तान की सुरक्षा व सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण अवसरों को विस्तार देने पर सहमति जताई।
मोदी ने काबुल में भारतीय दूतावास, चार वाणिज्य दूतावासों (कंधार, जलालाबाद, हेरात व मजार-ए-शरीफ), अफगानिस्तान में विभिन्न विकास परियोजनाओं में काम कर रहे भारतीय नागरिकों सहित अन्य भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अफगानिस्तान के अधिकारियों का शुक्रिया अदा किया।
दोनों नेताओं ने नाश्ते के दौरान, प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता की।
संसद में अपने संबोधन के बाद मोदी ने अफगानिस्तान के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) अब्दुल्ला अब्दुल्ला से व पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई से मुलाकात की।
उन्होंने अफगानिस्तान में कार्यरत भारतीय सहायताकर्मियों, इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) के कर्मियों तथा दूतावास के अधिकारियों से भी मुलाकात की।
dharmpath.com dharmpath