वाशिंगटन, 31 दिसंबर (आईएएनएस)। अमेरिका के एक विशेषज्ञ ने सुझाव दिया है कि पाकिस्तान पर लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) पर कार्रवाई के लिए दबाव डालकर वाशिंगटन बिना कोई सीधा हस्तक्षेप किए भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में गरमाहट ला सकता है।
वाशिंगटन में सेंटर फॉर ए न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी के अध्यक्ष रिचर्ड फोंटेन ने लिखा, “तनाव को कम करने व दशकों पुराने विवादों के समाधान का वाशिंगटन स्वागत करेगा।”
उन्होंने कहा, “ओबामा प्रशासन को वार्ता में सीधे हस्तक्षेप के किसी भी आग्रह का विरोध करना चाहिए।”
उन्होंने उल्लेख किया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ सामान्य अंतर्राष्ट्रीय समर्थन की तलाश करेंगे।
लेकिन उन्हें अमेरिकी मध्यस्थ की जरूरत नहीं है।
रिचर्ड ने कहा, “वाशिंगटन दो तरीकों से मददगार साबित हो सकता है। यह इस्लामाबाद को लश्कर-ए-तैयबा पर कार्रवाई के लिए पाकिस्तान पर दबाव बना सकता है, जो भारत विरोधी हिंसा की साजिश रचता आ रहा है और पाकिस्तान से इस बात का अनुरोध कर सकता है कि वह भारतीय मालों को अपने क्षेत्रों से होते हुए अफगानिस्तान ले जाने की मंजूरी प्रदान करे।”
मुंबई की तर्ज पर दूसरा हमला संबंधों को बिगाड़ने में अहम भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने कहा, “शांति के लिए हर तरह का प्रयास होना चाहिए।”
रिचर्ड ने कहा, “लश्कर का संस्थापक हाफिज सईद नवाज शरीफ की पहले ही आलोचना कर चुका है और इस बात की चेतावनी दे चुका है कि मोदी के साथ बेहतर संबंधों के लिए उन्हें कश्मीर का बलिदान नहीं देना चाहिए।”
उन्होंने लिखा, “अफगानिस्तान पहुंचने का भारत का रास्ता रोककर पाकिस्तान ने भारत को ईरान में चाबहार बंदरगाह को विकसित करने को उत्साहित किया है।”
उन्होंने कहा, “भारत के माल को अपने क्षेत्रों से होकर ढोने की मंजूरी देने से भारत व पाकिस्तान के बीच आर्थिक संपर्क बढ़ेंगे और इसके परिणामस्वरूप एक दिन अक्सर चर्चा में रहा तुर्कमेनिस्तान से भारत तक ट्रांस-अफगानिस्तान प्राकृतिक गैस पाइपलाइन का निर्माण कार्य संभव हो जाएगा।”
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