बीजिंग, 6 जनवरी (आईएएनएस)। चीन में पहली बार एक स्थानीय अदालत ने समलैंगिक शादी के अधिकार की मांग को लेकर किए गए मुकदमे को स्वीकार कर लिया है। हूनान प्रांत के चांगशा की स्थानीय अदालत में यह मुकदमा दायर किया गया, जो देश में एलजीबीटी (समलैंगिक, उभयलिंगी और किन्नर) अधिकारों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
वादी सुन नेनलिग (परिवर्तित नाम) एक समलैंगिक व्यक्ति हैं। उन्होंने ‘ग्लोबल टाइम्स’ को बताया कि उन्होंने यह मुकदमा फूरोंग जिले के नागरिक मामलों के ब्यूरो के खिलाफ दायर किया, जिसने उनकी समलैंगिक शादी के पंजीकरण की याचिका को खारिज कर दिया था।
सुन ने यह मुकदमा 16 दिसंबर, 2015 को दायर किया था जब ब्यूरो के एक अधिकारी ने उनके पंजीकरण आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि केवल ‘एक पुरुष और एक महिला’ के बीच की शादी का ही पंजीकरण हो सकता है।
सुन का दावा है कि उनकी ओर से अदालत में मुकदमा दायर कराए जाने के बाद पुलिस उन्हें परेशान करने उनके घर तक पहुंच गई। इसके बाद यह मामला काफी चर्चित हो गया और इंटरनेट पर इसकी खूब चर्चा हुई। कई एलजीबीटी कार्यकर्ताओं ने ऑनलाइन उनका उत्साह बढ़ाया।
सुन ने बताया, “पुलिस अधिकारी ने मेरे घर आकर मुझे समझाते हुए कहा कि बच्चे का होना महत्वपूर्ण है ताकि परिवार का नाम चलता रहे। लेकिन मुझे यह स्वीकार नहीं है कोई अपने मूल्यों को मुझ पर लादे।”
उन्होंने कहा, “विवाह कानून में यह कहीं नहीं लिखा है कि ‘एक पुरुष और एक महिला’, बल्कि उसमें एक पति और एक पत्नी का उल्लेख है। मैं समझता हूं कि यह न सिर्फ पारंपरिक जोड़ों के लिए बल्कि किसी समलैंगिक जोड़े के लिए भी लागू होता है।”
अनुमान है कि इस मामले पर अगले छह महीने में अदालत की तरफ से फैसला आ जाएगा।
चीन में 1997 में एलजीबीटी समुदाय को कानूनी मंजूरी दे दी गई थी। किन्नर समुदाय सेक्स परिवर्तन की सर्जरी के बाद कानूनी दस्तावेजों में भी अपना लिग परिवर्तन करवा सकते हैं।
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