चीन ने अगस्त में युआन की कीमत ज्यादा से ज्यादा बाजार आधारित बनाने के लिए अपने केंद्रीय बैंक पीपल्स बैंक ऑफ चाइना (पीबीओसी) के विदेशी मुद्रा विनिमय प्रणाली में अगस्त में बदलाव किया था।
साल 2016 के प्रथम दो कारोबारी दिनों में चीन में जहां युआन की कीमत में 4.05 फीसदी की गिरावट देखी गई, वहीं हांगकांग में इसमें लगातार गिरावट का रुख रहा। वहां एक समय तो इसकी कीमत गिरकर 1.3 फीसदी तक आ गई थी, जिसके असर से चीन में भी युआन की कीमत और ज्यादा गिरने लगी।
युआन की कीमत में अल्पकालिक गिरावट का प्रमुख कारण निवेशकों द्वारा चीन से पैसा निकालना है, क्योंकि चीन की अर्थव्यवस्था में गिरावट का रुख है।
चीन में उद्योग जगत से लेकर हाउसिंग सेक्टर तक मंदी का शिकार है। इस दौरान अमेरिका में मंदी से उबरने का रुख देखा जा रहा है। खासतौर से दिसंबर में जिस तरह से अमेरिका ने अपने यहां ब्याज दरों में वृद्धि की है, उससे वहां की अर्थव्यवस्था में मजबूती का पता चलता है। साल 2015 में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी का रुख होने की संभावना है।
हालांकि चीन के पास विशाल विदेशी मुद्रा रिजर्व 34 खरब अमेरिकी डॉलर है, जिससे वह एक हद तक मुद्रा अवमूल्यन को रोकने में कामयाब हो सकता है। वहीं, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने दुनिया की चुनिंदा प्रमुख मुद्राओं में युआन को भी शामिल कर लिया है, जो इस साल अक्टूबर से प्रभावी होगा। इससे युआन के अंतराष्ट्रीयकरण में तेजी आएगी।
युआन की मजबूती के लिए एक और अच्छी बात यह है कि दुनिया भर में कमोडिटी की कीमतें लगातार गिर रही हैं। इससे लागत में कमी का फायदा चीन को मिल सकता है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है। इस फायदे से चीन के चालू खाते में अतिरिक्त राशि इकट्ठा होगी और देश से बाहर कम पूंजी जाएगी। इससे चीन के विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि होगी।
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में कमी का लाभ भी चीन को मिलेगा। उदाहरण के लिए कच्चे तेल की कीमत में 10 डॉलर की कमी से चीन की लागत में सालाना 25 डॉलर की कमी आती है।
गोल्डमैन सैक्स के अनुमान के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में हो रही गिरावट से चीन को इस साल 360 अरब डॉलर की अतिरिक्त बचत होगी।
चीन की सरकार अब युआन की कीमत और नहीं गिरने देना चाहती है और उसका जोर इसे वत्र्तमान गिरावट पर ही स्थिर रखने का है। जब पीबीओसी ने अगस्त में अपने विदेशी मुद्रा विनिमय नियमों में बदलाव किया था तो आशंका जताई गई थी कि चीन जानबूझकर युआन की कीमत गिरा रहा है, ताकि निर्यात में बढ़े। लेकिन यह निराधार धारणा साबित हुई। चीन सरकार का ऐसा कोई इरादा नहीं है, हालांकि चीन के विदेशी व्यापार में काफी ज्यादा गिरावट देखने को मिल रही है।
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