हेबेई के गवर्नर झांग क्विं गवेई ने कहा कि जरूरत से अधिक उत्पादन की समस्या से निजात पाने के लिए 2020 तक इस्पात और सीमेंट उत्पादन (प्रत्येक) की सीमा 20 करोड़ टन तथा फ्लैट शीशे की 20 करोड़ वेट केस तय की जाएगी।
केंद्र सरकार ने अगले पांच साल के लिए अतिरिक्त क्षमता घटाने का प्राथमिकता बनाई है।
स्थानीय विकास के लिए भारी उद्योग पर जरूरत से अधिक निर्भरता के कारण हेबेई के सामने देश-विदेश में लगातार मांग कम रहने का जोखिम पैदा हो गया है। कुछ इस्पात निर्माता कंपनियां मामूली लाभ में चल रही हैं, जबकि इससे भी अधिक कंपनियां घाटे में चल रही हैं।
इस्पात, सीमेंट और ग्लास उद्योग को क्षेत्र में प्रदूषण का भी बड़ा कारण बताया जा रहा है।
प्रांतीय सरकार ने पहले भी कहा था कि वह 2013 के मुकाबले 2017 तक इस्पात, सीमेंट और कोयला उत्पादन में कुल 16 करोड़ टन तथा ग्लास उत्पादन में 3.6 करोड़ वेट केस कटौती करेगी।
इस कटौती का नकारात्मक असर हालांकि हेबेई की विकास दर पर पड़ा है, जो 2015 के प्रथम नौ महीने में 6.5 फीसदी रही।
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