मणिपुर में लुप्तप्राय हिरण के संरक्षण में मदद देगा केंद्र : जावड़ेकर

इंफाल, 10 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि केंद्र बारहसिंघे की सींग की शाखा वाले हिरण (ब्रो एंट्लर डियर) के संरक्षण में हर संभव मदद देगा। 2013 की जनगणना के मुताबिक पूरी दुनिया में ऐसे 204 हिरण ही बचे हैं। इनके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।

इंफाल, 10 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि केंद्र बारहसिंघे की सींग की शाखा वाले हिरण (ब्रो एंट्लर डियर) के संरक्षण में हर संभव मदद देगा। 2013 की जनगणना के मुताबिक पूरी दुनिया में ऐसे 204 हिरण ही बचे हैं। इनके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।

स्थानीय भाषा में संगाई कहे जाने वाले इन हिरणों के प्राकृतिक वास केइबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान में जावड़ेकर ने शनिवार को यह ऐलान किया।

मणिपुर से मिजोरम रवाना होने से पहले जावड़ेकर ने कहा, “आधिकारिक जानकारी के अनुसार 90 हिरण, 86 हिरणियां और 28 मृग छौने बचे हैं। इस लुप्तप्राय प्रजाति को बचाने के लिए सभी मदद दी जाएगी।”

यह पूछने पर कि क्या सरकार हाथी परियोजना या गैंडा परियोजना जैसा कुछ इन हिरणों के लिए भी सोच रही है, जावड़ेकर ने कहा, “मणिपुर के वन विभाग से ठोस प्रस्ताव मिलने पर हम परियोजना पर विचार करेंगे।”

मणिपुर सरकार ने पूर्वी भारत में पीने के साफ पानी की सबसे बड़ी झील, लोकटक झील को विश्व धरोहर की सूची में शामिल करने की मांग की है। इस पर जावड़ेकर ने कहा, “हम इस योजना का स्वागत करते हैं। लेकिन, इस बारे में प्रस्ताव पहले केंद्र के पास आने दें।”

झील के आसपास के गांवों में इस मांग का विरोध हो रहा है। इस पर जावड़ेकर ने कहा कि सरकार की योजना किसी के खिलाफ नहीं है। सरकार सभी का सहयोग लेगी।

इन गांवों की जिंदगी काफी हद तक इस झील पर निर्भर है।

पूरे राष्ट्रीय उद्यान को बंद करने के लिए भी ग्रामीणों को कुछ राजनीतिज्ञ भड़काते रहते हैं। उनका कहना है कि इसे बंद करने से यहां धान की खेती के लिए जमीन मिल जाएगी।

उग्रवाद प्रभावित राज्य में सुरक्षा कर्मियों से हथियार छीनने की घटनाएं होती रहती हैं। इसलिए उद्यान और झील के पास के सुरक्षाकर्मियों को हथियार नहीं दिए गए हैं।

ग्रामीणों और इन गार्डो के बीच विवाद की खबरें आती रहती हैं। मणिपुर राइफल्स के कुछ जवानों को यहां तैनात किया गया था। लेकिन, वन विभाग उनका खर्चा नहीं उठा सका। इसलिए उन्हें हटाना पड़ा।

वन्यजीव प्रेमी देविका एल ने कहा कि झील में मछली पकड़ने गए मछुआरों की आड़ में अवैध शिकारी भी उद्यान में पहुंच जाते हैं (झील उद्यान के अंदर है)। यही लोग हिरणों का अवैध शिकार कर रहे हैं।

जावड़ेकर ने कहा कि उद्यान और झील की रक्षा का काम अकेले मणिपुर के वन विभाग पर नहीं छोड़ा जा सकता। इसमें सभी का सहयोग चाहिए। केंद्र जल्द ही इस पर कार्ययोजना पेश करेगा।

About admin


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493