पर्थ, 13 जनवरी (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेन्द्र सिंह धौनी ने पहले एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मैच में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच विकेट की हार के बाद मेहमानों के खिलाफ एक साजिश का संकेत दिया है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, मंगलवार को हुए मैच में जॉर्ज बेले को आउट ना दिए जाने पर धौनी अंपयारों से नाखुश दिखे। रिप्ले में दिखाया गया था कि गेंद बेले के दस्तानों में छूकर गई है, बावजूद इसके अंपायर ने उन्हें आउट नहीं दिया था।
अगर डिशिजन रिव्यू सिस्टम (डीआरएस) होता तो फैसला भारत के पक्ष में आता और मैच का परिणाम कुछ और हो सकता था।
मैच के बाद हुए संवाददाता सम्मेलन में धौनी ने कहा कि भारत को डीआरएस के खिलाफ जाने की सजा मिली है। यह तकनीक पर आधारित सिस्टम है जो टीमों को संदेहास्पद फैसलों पर मदद करता है और खराब अंपायरिंग से होने वाले नुकसान से बचाता है।
धौनी ने कहा, “इससे मैच बदल सकता था लेकिन हमारी कोशिश अंपयारों को सही फैसले लेने के लिए प्रेरित करने की होनी चाहिए। आपने देखा कि किस तरह से 50-50 फैसले हमारे पक्ष में नहीं रहे। मैच में ऐसा होता रहता है लेकिन मैं अभी भी डीआरएस से संतुष्ट नहीं हूं।”
उन्होंने कहा, “डीआरएस में अभी भी कुछ खामियां हैं। इसे बनाने वाले भी इस बात को मानते हैं।”
उन्होंने कहा, “आपको यह देखना पड़ता है कि यह आउट है या नहीं। अगर यह आउट है तो स्टंप को छूना चाहिए अगर नहीं है तो गेंद के आधे हिस्से को स्टंप से छूना चाहिए। इससे काफी समस्या खड़ी होती है क्योंकि क्रिकेट में एक इंच भी काफी मायने रखता है।”
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष शशांक मनोहर ने पिछले साल दिसंबर में कहा था कि भारत एकदिवसीय और टेस्ट किसी में भी डीआरएस को तब तक नहीं अपनाएगा जब तक यह ‘फुलप्रूफ’ नहीं होता।
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