काठमांडू, 25 जनवरी (आईएएनएस)। नेपाल में शवों के दाह-संस्कार के लिए पहली बार विद्युत शवदाह गृह की शुरुआत की गई है। हिंदू पारंपरिक दाह संस्कार के लिए अब तक लकड़ियों का प्रयोग करते रहे हैं।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विद्युत श्मशान का उद्घाटन संस्कृति, पर्यटन व नागरिक उड्डयन मंत्री आनंद प्रसाद पोखरेल ने किया।
यह काठमांडू के पशुपतिनाथ आर्यघाट पर बनाया गया है।
हिंदू धर्म के लोग घाट पर पारंपरिक तौर पर खुले में लकड़ियों को जलाकर शवों का दाह-संस्कार करते हैं।
पशुपति क्षेत्र विकास ट्रस्ट (पीएडीटी) के गोविंदा टंडन ने सिन्हुआ से कहा, “लकड़ियों के इस्तेमाल से होने वाला पारंपरिक दाह-संस्कार वायु व जल प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है।”
उन्होंने कहा, “यह समय न केवल पर्यवरण संरक्षण का है, बल्कि विद्युत दाह-संसकार की तुलना में यह काफी महंगा है। हम दाह-संस्कार की इस नई विधि को अपना रहे हैं।”
टंडन ने कहा कि बागमती नदी के किनारे खुले में एक शव के दाह-संस्कार में चार घंटे से अधिक का समय लगता है।
उन्होंने कहा कि खुले में एक शव को जलाने में 300 किलोग्राम लकड़ी, घास, घी व अन्य तत्वों की जरूरत होती है।
पीएटीडी के मुताबिक, इस नई विधि से एक शव के दाह-संस्कार में लगभग 45 मिनट का वक्त लगेगा।
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