संयुक्त राष्ट्र, 27 जनवरी (आईएएनएस)। भारत ने संयुक्त राष्ट्र से ईराक और सीरिया के चरमपंथी और कट्टरपंथी संगठनों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि मध्य-पूर्व और खाड़ी क्षेत्र में शांति स्थापित हो सके। भारत ने संयुक्त राष्ट्र से इस क्षेत्र में संघर्षरत सभी पक्षों को सीरिया के नेतृत्व में वार्ता के लिए तैयार करने और व्यापक राजनीतिक समाधान निकालने की मांग की।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने मध्य-पूर्व सुरक्षा परिषद की बहस में मंगलवार को प्रतिबंधित संगठनों की गतिविधियों पर चिता जताते हुए कहा कि पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र, खासकर ईराक और सीरिया में चरमपंथी और कट्टरपंथी समूहों ने शांति और स्थायित्व को बुरी तरह प्रभावित कर रखा है। इस खतरनाक प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए इस क्षेत्र के सभी हितधारकों व दलों को मिलकर प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने हालांकि किसी चरमपंथी संगठन का नाम लेने से परहेज किया, लेकिन उनका इशारा आईएसआईएस की तरफ था। इसके अलावा अलनूसरा जैसे अन्य चरमपंथी संगठन भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं।
वहीं, इन चरमपंथी संगठनों के विरोधियों का मुख्य रूप से सीरिया और ईराक के कुछ हिस्सों पर नियंत्रण है, जिनकी मदद अलग-अलग समूह कर रहे हैं। इनमें अमेरिका, सऊदी अरब और खाड़ी क्षेत्र के देश और सीरियाई सरकार के विरोधी समूह एक तरफ है तो दूसरी तरफ सीरिया, रूस और ईरान है।
अकबरुद्दीन ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रायोजित सीरियाई शांति सम्मेलन को समर्थन देने की घोषणा की थी। सम्मेलन सोमवार से शुरू होना था, लेकिन इस बात पर आम सहमति नहीं बन पाई कि अल-असद के किस विरोधी गुट को प्रतिनिधि माना जाए।
अकबरुद्दीन ने कहा, “हमें उम्मीद है कि संयुक्त राष्ट्र के मध्यस्थता प्रयासों का नतीजा जरूर निकलेगा। हम सभी पार्टियों से अपेक्षित राजनीतिक इच्छाशक्ति प्रकट करने और संयत होकर अपने मतभेदों का समाधान करने का आह्वान करते हैं।”
अकबरुद्दीन ने कहा कि भारत ने सीरियाई शरणार्थियों के लिए 40 लाख डॉलर की मानवीय सहायता प्रदान की है और अगले महीने लंदन में होनेवाले सीरिया दानदाता सम्मेलन में और भी सहायता दी जाएगी।
वहीं, इस क्षेत्र में यमन में जारी संघर्ष को लेकर अकबरुद्दीन ने कहा, “हम यमन के सभी संबंधित पक्षों से यह गुजारिश करते हैं कि वे सौहार्दपूर्ण ढंग से अपने मतभेदों का समाधान करें। हमें उम्मीद है कि संयुक्त राष्ट्र का मध्यस्थता प्रयास यमन के लोगों को आम सहमति के आधार पर समाधान ढूंढने में मदद करेगा।”
वहीं, लंबे समय से चल रहे फिलिस्तीन इजरायल संघर्ष पर अकबरुद्दीन ने कहा, “भारत अपने रुख पर दृढ़ है कि समस्या का समाधान आपसी बातचीत से ही संभव है।”
भारत ने अपने पारंपरिक मित्र फिलिस्तीन और इजरायल, जिसके साथ भारत ने हाल ही में घनिष्ठ संबंध विकसित किया है, के बीच मध्य मार्ग अपनाते हुए कहा, “हमें उम्मीद है कि दोनों ही पक्ष शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे। इसी से फिलिस्तीन मुद्दे का स्थायी समाधान निकल पाएगा।”
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