टोक्यो, 9 फरवरी (आईएएनएस)। जापान में मंत्रिमंडल ने मंगलवार को यूनेस्को में दिए गए अपने उस निवेदन को वापस लेने पर मुहर लगा दी, जिसमें दक्षिण पश्चिम जापान के कुछ गिरजाघरों और ईसाई धर्म से जुड़ी कुछ अन्य जगहों को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने का अनुरोध किया गया था।
जापान टाइम्स की रपट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र के शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) के सलाहकार पैनल ने बीते महीने जापान से नागासाकी और कुमामोतो प्रांत की 14 नामांकित जगहों की पुनर्समीक्षा करने के लिए कहा था। पैनल ने इसकी वजह जापान सरकार द्वारा इन जगहों की ‘ओवरआल वैल्यू’ की व्याख्या नहीं कर पाने को बताया था। यह भी कहा था कि सरकार यह नहीं बता सकी है कि ये जगहें विश्व धरोहर जगहों के मानकों पर कैसे खरा उतरती हैं।
इन जगहों में 1864 में नागासाकी में बना औरा गिरजाघर और कुमामातो प्रांत में स्थित ईसाइयों के वे स्थल हैं, जहां 17वीं सदी में ईसाई समुदाय ने रोक, उत्पीड़न और यंत्रणा के बावजूद अपने धार्मिक रीति-रिवाजों को जिंदा रखा था।
यह वह समय था, जिसमें ‘छिपे ईसाई’ अस्तित्व में आए थे। ये वे लोग थे जिन्होंने बाह्य ईसाई जगत से संपर्क न होने के बावजूद अपनी ईसाई परंपराओं को हर जुल्म के बीच जिंदा रखा था।
सरकार का मानना है कि ये वे जगहें हैं, जो जापान में ईसाई धर्म के 250 साल के इतिहास के बारे में बताती हैं। जापान की कुल आबादी में एक फीसदी लोग ईसाई हैं।
जापान के सांस्कृतिक मंत्री हिरोशी हासे ने कहा कि वह स्थानीय नगर प्रशासनों के साथ मिलकर इन जगहों के बारे में और जानकारी इकट्ठा करेंगे और इन्हें विश्व धरोहर बनाने के लिए फिर से आवेदन करेंगे।
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