वाशिंगटन, 13 फरवरी (आईएएनएस)। वायु प्रदूषण के कारण हर साल पूरी दुनिया में करीब 55 लाख लोगों की असमय मौत हो जाती है। एक ताजा शोध से यह जानकारी सामने आई है।
शोध के अनुसार, अकेले भारत और चीन में वायु प्रदूषण के कारण पूरी दुनिया की 55 फीसदी मौतें होती हैं।
अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार, 2013 में चीन में वायु प्रदूषण के कारण 16 लाख जबकि भारत में 14 लाख लोगों की मौत हुई।
भारत, चीन, कनाडा और अमेरिका के अनुसंधानकर्ताओं की टीम के अनुसार, उत्सर्जन में कमी लाने के लगातार प्रयास किए जाने के बावजूद अगले दो दशकों में वायु प्रदूषण के कारण होने वाली मौतों की संख्या बढ़ेगी।
वाशिंगटन में शुक्रवार को आयोजित अमेरिकन एसोसिएशन फॉर द अडवांसमेंट ऑफ साइंस (एएएएस) की वार्षिक बैठक में यह शोध पेश किया गया।
वैंकुवर स्थित ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के जनसंख्या एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य महाविद्यालय में प्राध्यापक माइकल ब्रायर ने कहा, “पूरी दुनिया में असमय मृत्यु के पीछे वायु प्रदूषण चौथा सबसे बड़ा और बीमारियों के लिए सबसे बड़ा पर्यावरणीय खतरा है।”
ब्रायर ने कहा, “किसी भी आबादी के स्वास्थ्य में सुधार के लिए सबसे प्रभावी उपाय वायु प्रदूषण में कमी लाना है।”
बिजली संयंत्रों, औद्योगिक उत्पादन इकाइयों, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन और कोयला और लकड़ी के जलने से स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक सूक्ष्म कणों का वायु में उत्सर्जन होता है।
भारत में भोजन पकाने और सर्दियों में सेंकने के लिए लकड़ी, उपले और इसी तरह के अन्य जैव ईंधनों को जलाने का प्रचलन वायु प्रदूषण का मुख्य कारक बनकर उभरा है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मुंबई) के प्राध्यापक चंद्रा वेंकटरामन के अनुसार, “भारत में औद्योगिक स्तर पर कोयला जलाने, कृषि के तहत खुले में लगाई गई आग और घरेलू उपयोग के तहत होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए तीन-आयामी दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।”
वहीं चीन में कोयला जलाने से सर्वाधिक वायु प्रदूषण होता है।
अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि उनका शोध हानिकारक उत्सर्जन पर तत्काल और अत्यधिक प्रभावी लगाम लगाए जाने की वकालत करता है।
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