दक्षिणी हिन्द महासागर स्थित पश्चिमी ऑस्ट्रेलियाई तट पर विमान के मलबे की 12 महीने की खोज अगले 10 सप्ताह में समाप्त होने वाली है।
खोज का दायरा करीब 1,20,000 वर्ग किलोमीटर में फैला है। अब तक करीब 85,000 वर्ग किलोमीटर के समुद्री इलाके में खोजबीन की जा चुकी है लेकिन खोजकर्ताओं के हाथ कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं लगा।
अब तक की जांच से प्रतीत होता है कि ईंधन खत्म होने तक हिन्द महासागर के ऊपर उड़ान भरते वक्त विमान ‘ऑटोपायलट’ तरीके से चल रहा था, जिसमें विमान को तकनीकों के सहारे स्वत: ही उड़ान भरने के लिए छोड़ दिया जाता है।
हालांकि यदि विमान खोज क्षेत्र में नहीं मिलता है तो इसकी भी संभावना है कि इसे एक ऐसे पायलट द्वारा नियंत्रित किया जा रहा था, जिसने जानबूझकर हादसे को अंजाम दिया, जिससे इसमें सवार 239 लोगों की मौत हो गई।
ऑस्ट्रेलियाई परिवहन सुरक्षा ब्यूरो के मुख्य आयुक्त मार्टिन डोलन ने ‘टाइम्स ऑफ लंदन’ से कहा, “हम फिलहाल इस बिंदु पर नहीं पहुंचे हैं, लेकिन जल्द ही या बाद में यहां तक पहुंच सकते हैं। हमें सरकारों को बताना है कि और विकल्प क्या हो सकते हैं?”
उल्लेखनीय है कि विमान का एक पंखा (विंग) जुलाई में हिन्द महासागर स्थित फ्रांसीसी भूभाग रेयूनियों द्वीप पर मिला था और बाद में पुष्टि की गई थी कि यह एमएच 370 का है। इसके बाद उम्मीद बंधी थी कि प्रशासन विमान की तलाश के करीब पहुंच गया है, लेकिन उसके बाद से अब तक कोई अन्य हिस्सा नहीं मिला है।
ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया और चीन की सरकारें लापता विमान की खोज में जोरशोर से जुटी हैं।
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