जापान : अबे की नजर चुनाव सुधारों और संविधान संशोधन पर टिकी

टोक्यो, 20 फरवरी (आईएएनएस)। जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे ने शनिवार को कहा कि वह संसद के मौजूदा सत्र में चुनाव सुधार कानून को लागू होते देखना चाहते हैं साथ ही वह निचले सदन में सीटें कम करना चाहते हैं।

समचार एजेंसी सिन्हुआ ने अबे के हवाले से कहा है, “मैं चालू सत्र के दौरान 10 सीटें कम करना चाहता हूं ताकि चुनावी सुधारों की अपनी जिम्मेदारी पूरी कर सकूं।” उन्होंने यह बात संशोधित ‘पब्लिक ऑफिसेज इलेक्शन लॉ’ को पारित कराने के संदर्भ में कही।

अबे संसद के सर्वाधिक शक्तिशाली निचले सदन के सदस्यों की संख्या 10 कम करके 465 करना चाहते हैं। ऐसा करना चुनाव सुधार के हिस्से के तौर पर एक सीट वाले चुनाव क्षेत्रों में मतों की असमानता के मुकाबले के लिए है। इससे कुछ चुनावी जिलों का फिर से क्षेत्रीकरण देखने को मिलेगा।

मतों की असमानता ऐतिहासिक रूप से परेशानी की सबब रही है। इसके कारण कुछ क्षेत्रीय एवं उच्च न्यायालयों ने कुछ चुनावों को असंवैधानिक करार देने लायक भी पाया है।

जिन सुधारों के बारे में सोचा गया है उनका मकसद सबसे घनी और सबसे कम आबादी वाले इलाकों के बीच के मतों के अंतर को दोगुना से कम करना है।

अबे ने यह भी कहा है कि वह अपनी उन विवादित योजनाओं को जारी रखेंगे जिनमें जापान के युद्ध विरोधी संविधान के अनुच्छेद नौ के कुछ हिस्से में संशोधन किया जाना है।

अनुच्छेद नौ जापान को जल, थल और वायुसेना को युद्ध का सामथ्र्य रखने से रोकता है। दूसरे शब्दों में कहें तो अंतरराष्ट्रीय विवादों को निपटाने के लिए हिंसा का सहारा लेने से रोकता है।

दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान जब जापान सन 1945 में हार गया तब यह अनुच्छेद जोड़ा गया और तब पिछले 70 सालों में जापान को एक शांति प्रिय देश के रूप में उभरते देखा गया।

अबे ने कहा कि सर्वोच्च कानून में आत्मरक्षा बलों को मान्यता देनी चाहिए और देश के कानून में इसका प्रावधान किया जाना चाहिए।

जापानी पधानमंत्री ने कहा कि 60 साल पहले जब लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थापना हुई थी तभी से पार्टी की संविधान संशोधन करने की कामना रही है। अबे ने कहा कि वे इसे नहीं छोड़ेंगे और इस चुनौती को बरकरार रखेंगे।

संविधान संशोधन के लिए अबे को संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत की जरूरत पड़ेगी और उसके बाद जनमत संग्रह में भी बहुमत हासिल करनी होगी।

पिछले साल संसद के जरिये असंवैधानिक युद्ध विधेयकों को आगे बढ़ाया था। जिसके बाद उनके मंत्रिमंडल ने एकतरफा संविधान की पुनव्र्याख्या की थी।

तब अबे गुट को भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। लाखों लोग हर दिन सड़कों पर उतरकर अनुच्छेद 9 को बहाल करने और प्रधानमंत्री को अपनी युद्ध योजनाएं छोड़ने की मांग की थी।

अबे ने कहा है करों में वृद्धि योजना के मुताबिक जारी रहेगी।

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