आठ मार्च, 2014 को विमान ने कुआलालंपुर से बीजिंग के लिए उड़ान भरी थी, जिसके बाद से उसका कोई सुराग नहीं लग पाया है। विमान में 239 लोग सवार थे, जिसमें अधिकतर यात्री चीन के थे।
चेस्टर ने कहा कि हालांकि, विमान को लापता हुए दो साल बीत चुके हैं, लेकिन आस्ट्रेलिया विमान पीड़ितों के परिजनों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को नहीं भूला है।
उन्होंने मंगलवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि दक्षिणी हिंद महासागर में जारी खोज अभियान से पीड़ितों के परिजनों को काफी उम्मीदें हैं। इस खोज से ही पता चल पाएगा कि आखिरकार हुआ क्या था?
चेस्टर ने खोज अभियान के बारे में जानकारी देते हुए कहा “120,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के लगभग 90,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में खोज का कार्य पूरा हो गया है। हमारे जहाज सोनार और पानी के नीचे इस्तेमाल होने वाली तकनीक के माध्यम से खोज कर रहे हैं।”
इससे पहले मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रजाक ने कहा कि अगर मौजूदा खोज अभियान विफल होता है, तो इस क्रम में अगला कदम उठाने के लिए मलेशिया, आस्ट्रेलिया और चीन त्रिपक्षीय बैठक करेंगे।
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