चीन के मुताबिक, अमेरिका ने दक्षिणी चीन सागर में कई उकसाने वाली कार्रवाइयां कीं, जिसमें 30 जनवरी, 2016 को एक अमेरिकी मिसाइल विध्वंसक लड़ाकू नौसेनिक पोत ने चीन को बिना पूर्वसूचना दिए झोंगजियान डाओं में 12 नॉटिकल मील तक नौवहन किया, जो चीन के दावे के मुताबिक उसके शिशा द्वीपसमूह का हिस्सा है।
पेंटागन (अमेरिकी सैन्य मुख्यालय) ने बाद में दावा किया कि यह नौवहन की स्वतंत्रता अभियान के तहत था। इस बारे में चीनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और तटीय देशों की संप्रभुता, सुरक्षा और तटीय हितों की अवहेलना है।
10 दिसंबर 2015 को दो अमेरिकी बी-52 बमवर्षक विमानों ने चीन के नांशा द्वीपसमूह के हवाई क्षेत्र में उड़ान भरी। पेंटागन ने कहा कि खराब मौसम के कारण विमान भटक गए होंगे, इसकी जांच की जा रही है।
26 अक्टूबर, 2015 अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस लास्सेन ने चीनी सरकार की अनुमति के बिना जूबी रीफ के पानी में प्रवेश किया। चीन के मुताबिक जूबी रीफ उसके नांशा द्वीपसमूह का हिस्सा है।
21 जुलाई 2015 को अमेरिका के पैसिफिक फ्लीट कमांडर स्कॉट स्विफ्ट ने दक्षिण चीन सागर में पी-8ए पोसिडोन बमवर्षक विमान को साथ लेकर ‘सात घंटों तक समुद्री निगरानी अभियान चलाया।’ यह अमेरिका ने अपने सहयोगी दक्षिण चीन सागर के सबसे आक्रामक दावेदारों में से एक फिलीपींस को लाभ पहुंचाने के लिए किया।
20 मई 2015 को एक अमेरिकी पनडुब्बी रोधी और समुद्री निगरानी विमान पी-8ए ने चीन के नांशा द्वीपसमूह के ऊपर उड़ान भरी।
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