नेपीथा, 30 मार्च (आईएएनएस)। मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वाच (एचआरडब्ल्यू) ने बुधवार को म्यांमार सरकार से अनुरोध किया कि वह अपने पश्चिमी राज्य राखिन में रह रहे अल्पसंख्यक मुस्लिम रोहिंग्या समुदाय पर से ‘अपमानजनक प्रतिबंध’ हटा ले।
म्यांमार में हतिन क्याव द्वारा बुधवार को नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने के बाद गैर सरकारी अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था ने इस आशय का बयान जारी किया। हतिन ने नेपीथा स्थित संसद में राष्ट्रपति पद की शपथ ली। म्यांमार में करीब पचास वर्षो के बाद किसी निर्वाचित असैन्य राष्ट्रपति ने शपथ ली है।
निवर्तमान राष्ट्रपति थीन सीन ने मंगलवार को राखिन प्रांत से आपातकाल हटा दिया था। राखिन प्रांत में सन 2012 में बौद्धों और मुसलमानों के बीच दंगा होने के बाद आपातकाल लगाया गया था।
आपातकाल हटाने के संबंध में म्यांमार के दैनिक अखबार ‘दी न्यू लाइट’ की रपट के अनुसार क्षेत्रीय सरकार ने जब घोषणा की कि दोनों धार्मिक समुदायों के बीच तनाव से स्थानीय समुदायों को कोई खतरा नहीं है, तब आपातकाल समाप्त करने का आदेश दिया गया।
एफे समाचार एजेंसी के मुकाबले, एचआरडब्ल्यू एशिया के उप निदेशक फिल राबर्टसन ने कहा, “अब यह नई सरकार पर है कि वह लंबे समय से प्रताड़ित रोहिग्या अल्पसंख्यकों के बुनियादी अधिकारों को सुनिश्चित करे। “
सन् 2012 में संघर्ष के दौरान करीब 1,50,000 रोहिंग्या मुसलमानों को विस्थापित होना पड़ा था। ये लोग 67 शिविरों में रहते हैं और इन्हें घूमने फिरने की आजादी नहीं है।
बौद्धों और रोहिंग्या मुसलमानों के बीच इस क्षेत्र में हुए दंगों के दौरान 160 लोगों की मौत हुई थी जिनमें अधिकांश रोहिंग्या ही थे।
म्यांमार सरकार रोहिंग्या मुस्लिमों को अपना नागरिक नहीं मानती है। इन्हें अवैध ‘बांग्लादेशी’ आव्रजक मानती है।
एचआरउब्ल्यू के अनुसार रोहिंग्या मुसलमानों को शिक्षा तक पहुंच नहीं है। इन्हें मनमाने ढंग से हिरासत में लिया जाता है। इतना ही नहीं इन पर मनमाना कर लगाने के साथ इनसे जबरन मजदूरी भी करवाई जाती है।
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