लाल अंगूर में पाया जाने वाला एंटीऑक्सीडेंट रेसवेरेट्रॉल शरीर की मांसपेशियों और दिल के लिए काफी लाभदायक माना जाता है। यह यौगिक हृदय रोग के खतरे को कम करता है। इस यौगिक का प्रयोग रेड वाइन में सामान्यतया किया जाता है।
यह यौगिक गट माइक्रोबायोम (आंत के जीवाणु) में परिवर्तन कर हृदय रोग के जोखिम दूर करता है।
थर्ड मिलिट्री मेडिकल युनिवर्सिटी इन चाइना से इस अध्ययन के नेतृत्वकर्ता मान-तियान मी ने बताया, “हमारा अध्ययन रेसवेरेट्रॉल से एथेरोस्केलेरोसिस रोधी प्रभावों के क्रियातंत्र को समझने और हृदय रोग कम करने के लिए गट माइक्रोबायोटा को एक लक्षित कारक बनाए जाने वाला नया दृष्टकोण उपलब्ध कराता है।”
एथेरोस्केलेरोसिस एक बीमारी होती है, जो हृदय रोग से संबंधित है। वैज्ञानिकों ने हाल के कुछ सालों में देखा है कि गट माइक्रोबायोम धमनियों के अंदर प्लेक (प्लाक) का निर्माण करने में मदद करता है।
इस नए अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने चूहों पर शोध कर एथेरोस्केलेरोसिस के खिलाफ रेसवेरेट्रॉल के सुरक्षात्मक प्रभावों का गट माइक्रोबायोम के साथ परिवर्तन के संबंधों का पता लगाने की कोशिश की थी।
वैज्ञानिकों ने पाया कि रेसवेरेट्रॉल एथेरोस्केलेरोसिस के विकास को बढ़ाने वाले ट्राइमिथाइलामीन-एन-ऑक्साइड (टीएमएओ) के स्तर को कम करता है। साथ ही यह रेसवेरेट्रॉल टीएमए से उत्पादित होने वाले जीवाणुओं को भी रोकता है।
यह शोध अमेरिकन सोसाइटी फॉर माइक्रोबायलॉजी में प्रकाशित हुआ है।
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