वाशिंगटन, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका की प्रथम महिला मिशेल ओबामा ने मिसिसिप्पी के हाल के विवादित धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक की आलोचना की है। मानवाधिकार संगठन भी इस विधेयक की आलोचना कर रहे हैं।
मिशेल ने शनिवार को जैक्शन स्टेट युनिवर्सिटी में कहा, “हम यहां से स्पष्ट देख रहे हैं कि किस तेजी से प्रगति को पीछे की ओर धक्का दिया जा सकता है।”
उन्होंने कहा, “सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति या समूह, किन लोगों का है और वे किससे प्रेम करते हैं, उसे अलग-थलग करना कितना आसान है।”
पिछले पांच अप्रैल को एलजीबीटी (लेस्बियन, गे, बाईसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर समुदाय) के अधिकारों पर रोक लगाने का विवादित कानून पारित हुआ है, जिसे लेकर मिसिसिप्पी के बारे में मानवाधिकार समूहों की आलोचना बढ़ती जा रही है।
कानून के अनुसार, धार्मिक संगठन एलजीबीटी समुदाय के लोगों की शादी, गोद लेने या पालन पोषण की सेवा से मना कर सकते हैं। संस्थान उन्हें नौकरी से निकाल सकते हैं या नौकरी देने से मना कर सकते हैं, उन्हें संपत्ति बेचने या किराए पर देने से मना कर सकते हैं।
यही नहीं चिकित्सा क्षेत्र के पेशेवरों को सेक्स परिवर्तन आदि से जुड़ा उनका इलाज, परामर्श या ऑपरेशन करने से मना करने का अधिकार दिया गया है।
मिशेल ने कहा, “इसलिए हम सभी को हमारे सभी सहवासियों ईसाई, यहूदी, हिंदू प्रवासी, लेस्बियन, गे, बाईसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर और मूल अमेरिकियों को एकसाथ खड़ा होना होगा।
प्रथम महिला ने भाषण में यह भी कहा कि उनके पति ने राष्ट्रपति के रूप में जो राजनीतिक लड़ाई शुरू की है, वह उस पर कायम हैं। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे राजनीतिक माहौल में क्रोध और अपशब्द को लेकर उधेड़बुन में न पड़ें।
मिशेल ओबामा ने कहा, “हम उन लोगों पर अंतहीन ध्यान देते रहते हैं जो आपको काम करने नहीं देते, न्यायाधीशों को रोकते हैं, प्रवासन रोकते हैं, न्यूनतम वेतन बढ़ाने में अड़चन डालते हैं, वे सिर्फ रोकने का काम करते हैं।”
मिशेल ने अपने पति के राष्ट्रपति के रूप में आठ साल के कार्यकाल की आलोचना करने वालों का जवाब भी दिया। उनमें रिपब्लिकन पार्टी के डोनाल्ड ट्रंप के व्यंग्य का भी जवाब शामिल था।
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