जर्मन मीडिया ‘स्पीगेल ऑनलाइन’ की गुरुवार की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई महीने में वारसॉ में होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान अगर इस निर्णय पर सहमति बन जाती है, तो जर्मनी अपनी सेना को लिथुआनिया भेज सकता है।
जर्मन चांसलर एंजेला मार्केल ने नाटो सहयोगियों के साथ एक बैठक में जर्मनी की ओर से नाटो में शामिल होने का प्रस्ताव रखा।
रिपोर्ट के अनुसार, हनोवर में नाटो के कुछ सदस्य देशों-ब्रिटेन, फ्रांस, इटली के नेताओं की अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा और मर्केल के साथ हुई एक बैठक में नाटो की नियोजित इकाई में जर्मनी के राष्ट्रीय रक्षा बल के योगदान पर सहमति जताई गई।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ओबामा ने हनोवर बैठक से पहले संकेत दे दिए थे कि वह जर्मनी और ब्रिटेन से सैन्य योगदान की उम्मीद कर रहे हैं।
dharmpath.com dharmpath