गौरतलब है कि केन्या ने इस सप्ताह के शुरुआत में कहा था कि वह अगले साल मई तक उत्तर पूर्व केन्या स्थित दुनिया के सबसे बड़े शरणार्थी शिविर दादाब के सभी सोमाली शरणार्थियों को वापस स्वदेश भेज देगा।
पूर्वोत्तर केन्या में स्थित दादाब शरणार्थी शिविर 20 साल पहले बनाया गया था। यह दुनिया का सबसे बड़ा शरणार्थी शिविर है, जहां करीब 3,30,000 शरणार्थी रहते हैं। इनमें से अधिकतर सोमालिया से हैं।
सोमालिया के गृह मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी एक बयान में केन्या के निर्णय पर आपत्ति जताई गई है। सोमालिया ने कहा है कि दादाब शिविर के बंद होने से इस क्षेत्र के समक्ष नई सुरक्षा चुनौतियां पैदा हो जाएंगी। खासकर सोमालिया के लिए जहां इस्लामी आतंकवादी समूह अल शबाब की गतिविधियों की वजह से सुरक्षा की स्थिति काफी नाजुक है।
केन्या के गृह मंत्रालय के मुख्य सचिव करंजा किबिचो ने बुधवार को कहा था, “हम दुनिया को आश्वस्त कर रहे हैं कि मई तक दादाब में कोई शरणार्थी नहीं होगा।”
किचिको ने कहा कि दादाब शरणार्थी शिविर में आतंकवादियों की घुसपैठ हो गई है। उन्होंने आशंका जताई कि सोमालियाई इस्लामी गुट अल शबाब ने दादाब शिविर में ठिकाने बना रखे हैं।
इसी दिन केन्या के आतंरिक कैबिनेट मंत्री जोसेफ कासेरी ने कहा था कि केन्याई सरकार ने दादाब के सभी सोमाली शरणार्थियों की स्वदेश वापसी के लिए एक करोड़ डॉलर खर्च करने का निर्णय लिया है।
केन्या के इस निर्णय पर संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) ने भी आपत्ति जताते हुए शरणार्थी शिविर को बंद न करने का आग्रह किया है।
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