विदेश नीति पर आधारित एक पत्रिका में प्रकाशित लेख ने इन सभी आलोचनाओं का कड़ा जवाब दिया है। लेख में कहा गया है कि भारोपीय भाषाओं के समूह जैसे अंग्रेजी से इतर चीनी भाषा में अक्षरों या शब्दांश लेखन प्रणाली का उपयोग नहीं होता है। जिस वजह किसी विदेशी भाषी व्यक्ति के लिए इसे सीखना जरा मुश्किल हो जाता है।
इस लेख के लेखक टॉम मुलाने कहते हैं कि पश्चिम केंद्रित मानसिकता में आलोचनाएं भरी हुई हैं, जिसके तहत जो भी पश्चिमी सभ्यता से मेल नहीं खाता वह उनके लिए पिछड़ा और विकास के लिए खराब बन जाता है।
इन आलोचनाओं ने हालांकि चीन को कुछ खास प्रभावित नहीं किया है। यहां साक्षरता दर 95 प्रतिशत से अधिक है और साथ ही यह देश एक वैज्ञानिक नवाचार का केंद्र भी है।
इसके साथ ही कुछ लोग यह भी मानते हैं कि चीनी भाषा ‘क्वार्टी’ कीबोर्ड के लिए अनुपयुक्त है, लेकिन अब बहुत से चीनी युवा अपने पश्चिमी समकक्षों की तुलना में कीबोर्ड में तेजी से चीनी भाषा का उपयोग कर रहे हैं।
यह समझ से परे है कि कठिन भाषा की वजह से लोग इसे सीख नहीं सकते, बल्कि सही तरीके और अधिक प्रयास से कोई नहीं कह सकता कि यह भाषा सीखने में कठिन है।
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