बिल एंड मेलिंडा फाउंडेशन और अन्य धर्मार्थ संगठनों द्वारा शुरू की जाने वाली इस योजना का लक्ष्य उप-सहारा अफ्रीका के 30 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को बेहतर नस्ल की मुर्गियां देकर उनकी मदद करना है।
विश्व के सबसे अमीर व्यक्ति बिल गेट्स ने मंगलवार को अपनी वेबसाइट ‘गेट्सनोट्स डॉट कॉम’ पर कहा, “मेरे लिए यह बहुत स्पष्ट बात है कि जो कोई भी अधिक गरीबी में जी रहा है, उसके लिए मुर्गी पालन बेहतर है।”
उन्होंने कहा, “अगर कोई किसान पांच मुर्गियों के साथ काम शुरू करता है और उसके किसी पड़ोसी के पास प्रजनन के लिए एक मुर्गा है, तो उन दोनों लोगों को तीन महीनों में 40 मुर्गियां मिल सकती हैं। पश्चिमी अफ्रीका में सामान्यत: एक मुर्गी पांच डॉलर में बिकती है, और इस तरह वह एक साल में 1,000 हजार डॉलर कमा सकते हैं।”
बिल का मानना है कि मुर्गी पालन आसान और सस्ता है, और यह बच्चों को स्वस्थ रखने के साथ ही महिलाओं को भी सशक्त बनाता है।
बीबीसी अफ्रीका बिजनेस रपट के संपादक, मैथ्यू डेवीस ने हालांकि इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह योजना कुछ सवाल खड़े करती है।
मैथ्यू के मुताबिक, “अगर मुर्गियों की संख्या बढ़ती है तो उनके लिए इतना भोजन कहां से आएगा। मुर्गे-मुर्गियों की बढ़ती संख्या के चारे के लिए अधिक कृषि योग्य भूमि की आवश्यकता होगी।”
इसके अलावा उन्होंने कहा, “मांग और आपूर्ति के अर्थशास्त्र के अनुसार बाजार में अधिक मुर्गियों की वजह से औसत कीमतों में कमी आएगी।”
उन्होंने बताया, “इसके साथ ही इनके निस्तारण की भी समस्या उत्पन्न होगी।”
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